राधाकृष्ण का फाइल फोटो इंसेट में।
जागरण संवाददाता, एटा। घर में दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल था। राशन कार्ड में माता-पिता का नाम नहीं जुड़ा, इसलिए खाद्यान्न योजना का लाभ भी नहीं मिला। ऊपर से आठ माह से वृद्धावस्था पेंशन बंद। ऐसी बदहाल स्थिति में राधाकृष्ण का सब्र टूट गया और उन्होंने फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। बूढ़े और बीमार माता पिता के लिए वे ही एकमात्र सहारा थे, लेकिन सिस्टम उनका दर्द नहीं सुन सका।
डेढ़ वर्ष पूर्व हुई पत्नी की मौत के बाद सदमे में थे राधाकृष्ण
थाना मिरहची क्षेत्र के गांव जिन्हैरा निवासी 55 वर्षीय राधाकृष्ण ने बुधवार रात आर्थिक तंगी से परेशान होकर घर के बाहर विद्युत पोल पर फंदा लगा लिया था। गुरुवार सुबह उनका शव लटका मिला। डेढ़ वर्ष पूर्व पत्नी की मौत के बाद से वह मानसिक रूप से भी टूट चुके थे। मजदूरी कर परिवार चलाते थे, लेकिन बीमारी के चलते काम भी छूट गया। हालात इतने बिगड़ गए कि दो दिनों से घर में चूल्हा नहीं जला था।
दो दिन से घर में नहीं जला था चूल्हा
राधाकृष्ण के पिता लालाराम लकवा व गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं और बिस्तर से उठने में असमर्थ हैं। घर में चारपाई तक नहीं है। जमीन पर बिछे बिस्तर पर लेटे लालाराम और भगवान की तस्वीर के सामने बैठी उनकी पत्नी केला देवी मदद की आस लगाए दिखीं। पति के इलाज के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं।
बताया गया कि पेंशनधारकों के भौतिक सत्यापन के दौरान आठ माह पूर्व लालाराम की वृद्धावस्था पेंशन काट दी गई। सत्यापन करने वालों ने यह भी नहीं देखा कि वह योजना के वास्तविक पात्र हैं। यही पेंशन परिवार के लिए बड़ा सहारा थी, लेकिन महीनों से एक रुपया भी नहीं मिला।
टूटी-फूटी झोंपड़ी ही उनका आशियाना रही
परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी नहीं दिया गया। टूटी-फूटी झोंपड़ी ही उनका आशियाना रही। अब सवाल यह है कि पात्र होते हुए भी यह परिवार सरकारी योजनाओं से क्यों वंचित रहा। राधाकृष्ण की मौत के बाद अब यह मामला सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल है।
गांव के जिन्हैरा के राधाकृष्ण द्वारा की गई आत्म हत्या के मामले की जांच कराई जा रही है। लेखपाल और राजस्व विभाग की टीम मौके पर भेजी गई है। अगर योजनाओं का लाभ नहीं मिला है तो लाभ दिलाया जाएगा। पीड़ित परिवार की हर संभव मदद की जाएगी। यह भी देखेंगे कि पेंशन क्यों नहीं मिल रही थी। अन्य योजनाओं का लाभ क्यों नहीं मिला। -विपिन कुमार मोरल, एसडीएम सदर |
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