Chikheang • The day before yesterday 10:56 • views 362
डॉक्टर की कार के शीशे पर चस्पा नंबर का स्टीकर, बीआरडी मेडिकल कॉलेज। जागरण
गजाधर द्विवेदी, गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज में क्लास और अस्पताल छोड़कर निजी प्रैक्टिस करने वाले डाक्टरों पर अंकुश लगाने के लिए बीआरडी मेडिकल कालेज प्रशासन ने अनूठी पहल की है। कालेज में डाक्टरों की उपस्थिति और परिसर में ठहराव सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक डाक्टर को विशिष्ट नंबर जारी किया है। नंबर का स्टीकर बनवाकर डाक्टरों की गाड़ियों पर चस्पा कराया गया है।
नंबर के साथ डाक्टरों के नाम की सूची मुख्य गेट पर सुरक्षा गार्डों को उपलब्ध करा दी गई है। डाक्टर के कालेज में आते ही रजिस्टर पर नंबर व समय दर्ज हो जाता है। गाड़ी परिसर से जैसे ही बाहर जाती है, उसका समय भी अनिवार्य रूप से नोट किया जाता है। हर हफ्ते प्रशासनिक बैठक में इसका लेखा-जोखा रखा जा रहा है।
इस प्रक्रिया के जरिये यह स्पष्ट रूप से पता चल जाता है कि कौन डाक्टर कालेज परिसर में कितनी देर तक मौजूद रहे। पहले जहां ड्यूटी के दौरान कई डाक्टर दो-तीन घंटे बाद ही कालेज से बाहर निकल जाते थे और निजी क्लिनिक या अस्पतालों में प्रैक्टिस करते थे, अब उस पर काफी हद तक अंकुश लग गया है।
यह भी पढ़ें- गोरखपुर एम्स के पूर्व ईडी और उनके बेटे के खिलाफ दर्ज हुई FIR, फर्जी प्रमाण पत्र पर प्रवेश दिलाने का लगा है आरोप
प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था केवल निगरानी के लिए नहीं, बल्कि रोगियों के हित में लागू की गई है। गार्डों द्वारा प्रतिदिन एकत्र किए गए डाटा की समीक्षा साप्ताहिक बैठकों में की जा रही है। इन बैठकों में यदि कोई डाक्टर निर्धारित ड्यूटी समय से कम अवधि तक कालेज में मौजूद रहते हैं तो उससे जवाब-तलब किया जाता है। इस कारण अब वे ड्यूटी के समय परिसर छोड़ने से बचने लगे हैं।
इस पहल से रोगियों को सीधा लाभ मिलेगा। ओपीडी, वार्ड और इमरजेंसी में डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता से उपचार में देरी की समस्या कम होगी। साथ ही जूनियर डाक्टरों और मेडिकल छात्रों को भी सीनियर डॉक्टरों का मार्गदर्शन समय पर मिल सकेगा। छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी। -
-डाॅ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज। |
|