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आगरा के किसान तुहीराम: 12 साल बाद झूठे केस से हुए बरी, बोले - अपराधी की तरह काटे इतने वर्ष, पुलिस देख छिप जाता था

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किसान तुहीराम।



जागरण संवाददाता, आगरा। पुलिसकर्मियों की लापरवाही से बेगुनाह होते हुए भी किसान ने 12 साल अपराधी की तरह काटे। घर पर पुलिस दबिश देती रही, गिरफ्तारी से बचने के लिए वह कभी पड़ोसी तो कभी रिश्तेदारों के यहां छिपते रहे। अदालत के फैसले के बाद पीड़ित 73 वर्षीय तुहीराम के चेहरे पर निर्दोष साबित होने की खुशी है, लेकिन 12 साल तक बेवजह परेशान होने के लिए लापरवाह पुलिसकर्मियों के प्रति आक्रोश है।

दो टूक कहा पुलिस ने काम सावधानी से किया होता तो बेवजह परेशान नहीं होना पड़ता। बिजली चोरी का कलंक उनके माथे पर नहीं लगता। जरूरत पड़ी तो लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ मानहानि का केस करेंगे। अपने अपमान और सामाजिक प्रतिष्ठा तार-तार होने का हिसाब करेंगे।
बोले, जरूरत पड़ी तो लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ मानहानि का करेंगे केस

अछनेरा क्षेत्र के गांव साही में रहने वाले तुहीराम को दरवाजे पर खड़े होकर जब कोई नाम लेकर पुकारता तो वह पुलिसकर्मी समझकर सहम जाते थे। अब ऐसा नहीं हैं, रिपोर्टर ने दरवाजे पर खड़े होकर उन्हें नाम लेकर पुकारा तो वह मुस्कुराते हुए घर के बाहर आ गए। ऐसा इसलिए हुआ, क्यों कि बिजली चोरी के मुकदमे में 12 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद तुहीराम पुत्र मोहन बरी हो गए हैं।

बताया कि गांव के कुछ घरों में बिजली चोरी पकड़े जाने पर 29 नवंबर 2012 अछनेरा थाने में अवर अभियंता ने गांव हमनाम तुहीराम पुत्र मोना राम के अलावा आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
गांव और रिश्तेदारों में धूमिल हुई थी छवि, अफसरों से भी नहीं मिली कोई राहत

  • पुलिस ने चार्जशीट में तुहीराम पुत्र मोहन को आरोपित बना दिया।
  • 2014 में अदालत से नोटिस आने जानकारी हुई। इसके बाद पुलिसकर्मी गिरफ्तारी के लिए घर आने लगे।
  • गिरफ्तारी से बचने के लिए वह कभी पड़ोसी के यहां, कभी रिश्तेदारों के यहां छिप जाते।
  • गैर जमानती वारंट जारी होने पर 14 मार्च 2022 को अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया, जो खारिज हो गया।
  • 29 सितंबर 2025 को जमानत मिली। इस बीच उन्होंने पुलिस, बिजली विभाग के कई चक्कर लगाए।
  • अफसरों को शिकायती पत्र दिया। सभी ने मामला कोर्ट में होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया।


  
चैन से सो नहीं पाते थे, परिवार भी था परेशान

तुहीराम ने बताया कि नोटिस आने के बाद से नींद उड़ गई। पुलिस घर आने लगी तो चैन से सो नहीं पाते थे। पत्नी साबो के अलावा बेटा कृष्ण पाल, जितेंद्र व अन्य स्वजन भी परेशान रहने लगे थे। कानूनी लड़ाई में परिवार का पूरा सहयोग मिला। उन दिनों आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होते के बाद भी लोगों ने रुपये उधार लेकर केस लड़ा। मुकदमे की पैरवी में करीब 35 हजार रुपये खर्च हो गया।
कनेक्शन काटने के बाद भी आता रहा बिल

तुहीराम दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के रवैये से भी परेशान रहे। उन्होंने बताया कि 13 जनवरी 2007 को 6953 रुपये बकाया जमा करके बिजली का कनेक्शन स्थाई रूप से कटवा दिया था। बावजूद इसके बिल आता रहा। बिजली विभाग में शिकायत की, लेकिन राहत नहीं मिली। इसके बाद लोक अदालत में गए। लोक अदालत ने राहत देते हुए 23 नवंबर 2013 को बिजली बिल के 18874 रुपये निरस्त करने के आदेश दिए थे।
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