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हरियाणा में इंदौर जैसा खतरा! 18 जिलों के 51 गांवों का पानी जहरीला; कैंसर और डायबिटीज समेत इन रोगों के बढ़े मरीज

LHC0088 5 day(s) ago views 143
  

अधिक रसायनों से जहरीला बन रहा पेयजल, सेहत के लिए बढ़ रहा खतरा।  



राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में पेयजल की गुणवत्ता बेहद खराब है। जनस्वास्थ्य एवं आपूर्ति विभाग या अन्य स्रोतों द्वारा सप्लाई किया जा रहा पेयजल हो या फिर भूमिगत जल, निर्धारित मानकों से अधिक मात्रा में मौजूद रसायनिक पदार्थ इसे जहरीला बना रहे हैं।

जल शक्ति मंत्रालय के अधीनस्थ जल संसाधन, कृषि एवं भूजल विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक संगठन केंद्रीय भूजल बोर्ड की नवंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश का एक भी जिला ऐसा नहीं है जहां नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक न हो। विभिन्न स्थानों पर फ्लोराइड, नाइट्रेट, आर्सेनिक और यूरेनियम के साथ ही ईसी (विद्युत चालकता) की अत्यधिक मात्रा चिंताजनक है।

रिपोर्ट के मुताबिक 18 जिलाें के 51 गांवों में भूजल आर्सेनिक की मात्रा बढ़ने से जहरीला हो गया है। बहादुरगढ़ (झज्जर) के छारा गांव में आर्सेनिक का स्तर 0.299 मिलीग्राम/लीटर मिला है, जो स्वीकार्य सीमा से लगभग 30 गुना अधिक है। इसी तरह भिवानी के गांव सूई और बवानी खेड़ा में आर्सेनिक का स्तर 0.2 मिलीग्राम/लीटर दर्ज किया गया, जो अनुमेय सीमा से 20 गुना अधिक है। बहल में आर्सेनिक का स्तर स्वीकार्य सीमा से 11 गुना अधिक पाया गया।

आर्सेनिक से कैंसर, त्वचा, हृदय रोग और मधुमेह सहित अन्य बीमारियों के मरीज बढ़े हैं। करनाल के नौ तथा सिरसा, भिवानी, रोहतक और सोनीपत के छह-छह गांव आर्सेनिक की समस्या से जूझ रहे हैं।

20 जिलों के 136 गांव भूजल में फ्लोराइड की अत्यधिक मात्रा से जूझ रहे हैं। भिवानी के लोहारवाला गांव में पानी में फ्लोराइड का स्तर 22 मिलीग्राम/लीटर तक दर्ज किया गया जो अनुमेय सीमा से 15 गुना अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार 1.5 मिलीग्राम/लीटर से अधिक फ्लोराइड सांद्रता वाला पानी पीने योग्य नहीं होता।

पानीपत के अटावला और जींद के उचाना में भी भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अत्यधिक है। भूजल में अपशिष्ट पदार्थों का मिश्रण बढ़ने से ब्लड प्रेशर, पथरी, दिमागी कमजोरी, शरीर में दर्द, पेट के रोग, पीलिया की शिकायतें बढ़ी हैं।

पेयजल में अशुद्ध पदार्थों के मिश्रण (टीडीएस) यथा सोडियम, मैग्नीशियम, मरकरी, नाइट्रेट, पैरागान की मात्रा 1000 से 2000 के घातक स्तर पर पहुंच गई है, जबकि टीडीएस 200 से 300 प्रति लीटर मिलीग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।

दरअसल, औद्योगिक क्षेत्रों से निकला दूषित पानी भूजल को प्रदूषित कर रहा है। खेतों में कीटनाशकों और उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहा है। कई क्षेत्रों में पीने के पानी का उचित शोधन नहीं हो रहा है। खराब गुणवत्ता वाले पानी के सेवन से उल्टी-दस्त, त्वचा रोग, फेफड़ों की बीमारियां, किडनी की समस्याएं, कैंसर का खतरा बढ़ रहा है।

हालांकि, प्रदेश सरकार पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए कुछ कदम उठा रही है। जल जीवन मिशन के तहत पानी की गुणवत्ता की जांच और मोबाइल वाटर टेस्टिंग वैन की शुरुआत की है। इसके बावजूद राज्य में पानी की गुणवत्ता अभी भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
हरियाणा में भूजल गुणवत्ता की स्थिति

श्रेणी -नमूने लिए -निर्धारित अनुमेय सीमा -अनुमेय सीमा से अधिक -नमूने फेल (प्रतिशत में)
ईसी (विद्युत चालकता) - 811 -3000 माइक्रोसीमेंस प्रति सेंटीमीटर -167 -20.59
फ्लोराइड -811 -1.5 मिलीग्राम/लीटर -177 -21.82
नाइट्रेट -811 -45 मिलीग्राम/लीटर -115 -14.18
आर्सेनिक -160 -10 पीपीबी (पार्ट्स पर बिलियन) -2 -1.25
यूरेनियम -160 -30 पीपीबी -24 -15
20 जिलों के पानी में ईसी निर्धारित मानकों से अधिक

अंबाला, भिवानी, चरखी दादरी, फरीदाबाद, फतेहाबाद, गुरुग्राम, हिसार, झज्जर, जींद, कैथल, करनाल, महेंद्रगढ़, मेवात, पलवल, पंचकूला, पानीपत, रेवाड़ी, रोहतक, सिरसा और सोनीपत
17 जिलों में फ्लोराइड ज्यादा

भिवानी, फतेहाबाद, गुरुग्राम, हिसार, झज्जर, जींद, कैथल, करनाल, महेंद्रगढ़, मेवात, पलवल, पंचकूला, पानीपत, रेवाडी, रोहतक, सिरसा, सोनीपत
नौ जिले जूझ रहे यूरेनियम की अधिकता से

अंबाला, फरीदाबाद, जींद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पलवल, पानीपत और सोनीपत
भूजल के अत्यधिक दोहन से गंभीर हुई स्थिति

राज्य का कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 10.27 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) आंका गया है, जिसमें से 9.30 बीसीएम भूजल का दोहन किया जा सकता है। इसके उलट सालाना 12.72 बीसीएम पानी अधिक निकाला जा रहा है जो कुल भूजल पुनर्भरण का 136.75 प्रतिशत है।

कुल 143 शहर और ब्लाक में से 91 (63.64 प्रतिशत) में जल का अति-दोहन हो रहा है। छह ब्लाक (4.20 प्रतिशत) को गंभीर, 15 ब्लाक (10.49 प्रतिश्त) को अर्ध-गंभीर माना गया है। केवल 31 ब्लाक (21.68 प्रतिशत) को सुरक्षित श्रेणी में रखा गया है।
हरियाणा में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी की स्थिति

जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग प्रदेश में 1870 नहर आधारित जल घर, 12 हजार 920 नलकूप, नौ रेनीवेल, तथा 4140 बूस्टिंग स्टेशन से पानी की सप्लाई कर रहा है। गांवों में 55 लीटर और शहरों में 135 लीटर पानी की प्रतिदिन प्रति व्यक्ति सप्लाई हो रही है। जल जीवन मिशन के अंतर्गत साढ़े 30 लाख लोगों के घरों में नल से जल सप्लाई हो रहा है।
3489 गांवों का पानी पीने लायक नहीं

हरियाणा के 3489 गांवों का पानी पीने लायक नहीं रह गया है। भूजल स्तर गिरने और गुणवत्ता खराब होने से संकट गहरा रहा है। 2246 गांवों में भूजल पाताल में चला गया है जबकि 25 गांव सेम की समस्या से जूझ रहे हैं।
हरियाणा के इन गांवों में भूजल की यह बनी है स्थिति

प्रदेश में भूजल की स्थिति गांव भूजल की गहराई
गंभीर रूप से भूजल संकट ग्रस्त गांव 2246 30 मीटर से अधिक
मध्यम भूजल संकट ग्रस्त गांव 1243 20 से 30 मीटर तक
संभावित भूजल संकट ग्रस्त गांव 1811 10 से 20 मीटर तक
संतोषजनक भूजल संकट ग्रस्त गांव 1117 05 से 10 मीटर तक
प्रदेश में सेम से प्रभावित गांव

सेम ग्रस्त बफर जोन के गांव 682- 03 से 05 मीटर तक
सेमग्रस्त गांव 279- 01 से 03 मीटर तक
गंभीर रूप से सेमग्रस्त गांव 25- 01 मीटर से कम
भूजल प्रभावित गांवों की संख्या 7403
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