अधिग्रहित जमीन पर बने अवैध बहुमंजिला भवनों को तोड़फोड़ दस्ते ने सोमवार को ध्वस्त कर दिया। (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा आली गांव में अधिग्रहित जमीन पर बने अवैध बहुमंजिला भवनों को तोड़फोड़ दस्ते ने सोमवार को ध्वस्त कर दिया। सरिता विहार मेट्रो डिपो की बाउंड्रीवॉल के साथ लगी करीब ढाई एकड़ भूमि को यहां के भूमाफिया ने भोले-भाले लोगों को बेच दिया था।
बेचते समय इन लोगों से जल्द रजिस्ट्री कराने का वायदा किया गया था। तोड़फोड़ की कार्रवाई के दौरान ये सभी लोग खुद को लुटा-पीटा महसूस कर रहे थे। सभी की आंखों में आंसू थे। वे प्रशासन को भी कोसते नजर आए।
दरअसल, आली गांव में सरिता विहार मेट्रो डिपो की बाउंड्रीवाल के साथ लगी करीब ढाई एकड़ जमीन कभी इसी गांव के रहने वाले चीरमोली परिवार की हुआ करती थी। कई साल पहले इस जमीन को डीडीए ने अधिग्रहित कर लिया था। मुआवजे की रकम ग्रामीण के खाते में हिस्सों के अनुसार भेज दी थी।
बताया जाता है कि ग्रामीणों ने डीडीए का मुआवजा स्वीकार नहीं किया था। ऐसे में वे इस जमीन को अपना ही मानते हैं। करीब दो साल पहले कथित भूस्वामी ने जमीन को लोगों को बेचना शुरू कर दिया था। लोगों से वायदा किया था कि उन सभी को रजिस्ट्री और मुटेशन कराकर दी जाएगी।
भरोसे में आकर लोगों ने एग्रीमेंट के आधार पर जमीन खरीद ली और किसी ने दो, किसी ने चार और किसी ने पांच मंजिला आलीशान मकान बना लिए। इस जमीन पर 30 से ज्यादा पक्के मकान बने हुए थे।
डीडीए के मुताबिक जब उनकी जमीन पर कब्जे हो रहे थे, सभी को चेताया था कि भूमि का स्वामी डीडीए है। वहां बोर्ड पर लगाया गया था, जिसे हटा दिया गया था। इसीलिए जमीन को खाली कराया गया है।
सोमवार को दो बड़ी जेसीबी मशीन बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ अवैध कब्जों को ढहाने पहुंची थी।सुबह नौ बजे कार्रवाई शुरू की गई। शाम चार बजे तक यह कार्रवाई चली। 50 प्रतिशत जमीन खाली करा ली थी, बाकी को हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी। इस कार्रवाई से पहले लोगों ने अपने घरों से सामान निकालकर बाहर रख लिया था।
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