दिल्ली विधानसभा। आर्काइव
डिजिटल डेस्क, दिल्ली। दिल्ली विधानसभा सदन में शहीदी दिवस के अवसर पर सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके साहिबजादों की अद्वितीय शहादत पर विशेष चर्चा की गई। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने गुरु परंपरा, बलिदान और राष्ट्र के लिए दिए गए त्याग को स्मरण करते हुए कहा कि यह शहादत न केवल सिख इतिहास बल्कि पूरे देश की अमूल्य धरोहर है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि आज भी देश में कई सड़कों और शहरों के नाम औरंगजेब, बाबर जैसे शासकों के नाम पर हैं, लेकिन गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के नाम पर पहले पर्याप्त पहचान नहीं थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनता की भावनाओं और इतिहास के प्रति सम्मान को समझते हुए इस दिशा में काम शुरू किया है, ताकि साहिबजादों के बलिदान को उचित सम्मान मिल सके।
चर्चा के दौरान साहिबजादों की शहादत का विस्तार से उल्लेख किया गया। गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादे-साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह्को, सरहिंद के नवाब वजीर खान ने इस्लाम धर्म स्वीकार न करने और गुरु के प्रति अपनी अटूट निष्ठा पर कायम रहने के कारण 27 दिसंबर 1704 (कुछ इतिहासकारों के अनुसार 1705) को दीवार में जिंदा चुनवा दिया था।
इतनी कम उम्र में दिया गया यह बलिदान आज भी मानव इतिहास में साहस और आस्था का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी के बड़े साहिबजादे-साहिबजादा अजीत सिंह और साहिबजादा जुझार सिंह, ने चमकौर के युद्ध में अत्यंत वीरता के साथ मुगल सेना का सामना किया और धर्म व स्वाभिमान की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। वहीं, साहिबजादों की शहादत का समाचार सुनकर उनकी दादी, माता गुजरी जी, ने भी सरहिंद के ठंडे बुर्ज में प्राण त्याग दिए।
विधानसभा में वक्ताओं ने कहा कि साहिबजादों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को सत्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा। शहीदी दिवस के अवसर पर सदन ने दो मिनट का मौन रखकर गुरु गोबिंद सिंह जी आ साहिबजादों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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