हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव पर संग्राम जारी है। प्रतीकात्मक फोटो
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में पंचायत चुनाव समय पर करवाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले पर सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी न होने पर बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी। जनहित याचिका में पंचायती राज चुनाव को समय पर करवाने के आदेश जारी करने की मांग की गई है।
यह याचिका यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने हेतु दायर की गई है कि राज्य में पंचायती राज संस्थानों के चुनाव संविधान के तहत अनिवार्य रूप से पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने से पहले आयोजित किए जाएं।
मांग की गई कि राज्य चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह चुनाव कार्यक्रम अधिसूचित करे। पंचायती राज संस्थानों के स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए बिना किसी देरी के सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
मांग है कि मौजूदा पंचायती राज संस्थानों को उनके पांच साल के कार्यकाल से आगे जारी रखने के किसी भी प्रयास को असंवैधानिक और शुरू से ही शून्य घोषित किया जाए।
हाई कोर्ट में दोनों पक्षों के बीच लंबी बहस के बाद भी कोई सहमति नहीं बन पाई। इस पर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कल बुधवार को भी सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया।
हाई कोर्ट ने की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले को दूसरी खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए रखने के आदेश जारी करने से पहले रिकॉर्ड का अवलोकन किया था। कोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड से यह पता चलता है कि आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को ध्यान में रखते हुए, 02.12.2024 को ही निदेशक-सह-विशेष सचिव, पंचायती राज विभाग को आवश्यक निर्देश जारी किए थे कि पुनर्गठन, परिसीमन और आरक्षण की पूरी प्रक्रिया 30.06.2025 तक पूरी कर ली जाए, ताकि आयोग चुनाव प्रक्रिया शुरू कर सके।
इसके बाद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 10.07.2025 को प्रधान सचिव (शहरी विकास) ने हिमाचल प्रदेश के सभी उपायुक्तों (लाहुल स्पीति और किन्नौर को छोड़कर) को एक पत्र जारी किया था कि जनगणना में देरी के कारण, शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी करके कार्यान्वयन/अंतिम रूप देने को तब तक के लिए स्थगित कर दिया जाना चाहिए, जब तक नवीनतम जनगणना डेटा उपलब्ध नहीं हो जाता।
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चुनाव आयोग ने उक्त पत्र को 11.07.2025 को अधिकार क्षेत्र के बिना जारी किया गया मानते हुए शुरू से ही शून्य घोषित कर दिया और सभी नगर पंचायतों, नगर परिषदों और नगर निगमों के संबंध में आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया और आगे निर्देश दिया कि उपायुक्त और अन्य कर्मचारी जो राज्य चुनाव आयोग के साथ प्रतिनियुक्ति पर होंगे, वे आयोग के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के अधीन होंगे और ऐसे सभी आवश्यक कार्य करेंगे। |
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