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पलवल में जर्जर पाइपलाइन और दूषित पानी से ढाई लाख लोग खतरे में, बदबूदार वाटर सप्लाई से कब मिलेगी मुक्ति

LHC0088 5 day(s) ago views 535
  

सेक्टर 2 की हाउसिंग सोसायटी आशियाना में पानी की जांच जांच करते प्राइवेट एजेंसी के मालिक जयदेव देशवाल। जागरण



जागरण टीम, पलवल। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने पूरे देश को सन्न कर दिया है। ऐसी घटना पलवल शहर में कभी घट सकती है। गंदी नालियाें व नालों के बीच से शहर भर में पीने के पानी की पाइपलाइन गुजर रही हैं। नालियां गंदी हैं, कीड़ों से भरी और उसी नाली के बीच से गुजर रहे पाइपलाइन का पानी लोगों के घरों में आ रहा है।... ऐसे में सवाल साफ है कि क्या हमारा पलवल शहर स्वच्छ पानी पी रहा है?

शहर की बदहाल पानी की सप्लाई व्यवस्था को देखकर ऐसा लगता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। शहर की काॅलोनियों की गलियों में बिछी जर्जर पाइपलाइन और गंदगी से लबालब खुले चैबरों के बीच से गुजरती पेयजल की लाइनें सीधे तौर पर गटर वाटर पिला रही हैं। शहर की ढाई लाख से अधिक आबादी को प्यास बुझाने के लिए 22 हजार नल कनेक्शन, 96 ट्यूबवेल और आगरा कैनाल पर निर्भर रहना निर्भर रहना पड़ता है।

सोमवार को दैनिक जागरण की टीम ने पानी की जांच करने वाली एक प्राइवेट एजेंसी के जयपाल देशवाल के साथ शहर की विभिन्न काॅलोनियों व सोसायटियों का जायजा लिया, तो सिस्टम की रूह कंपाने वाली लापरवाही सामने आई। कहीं कचरे के ढेरों के बीच पाइपलाइन दबी मिली। तो कहीं गंदी नालियों से होकर संक्रमण घरों तक पहुंच रहा है। लीक होते पाइपलाइन और बदबूदार रास्तों से गुजरती यह पानी सप्लाई व्यवस्था चीख-चीखकर किसी बड़े खतरे का संकेत दे रही है।

यदि प्रशासन अब भी नींद से नहीं जागा, तो शहर की सेहत कभी भी बेकाबू हो सकती है। शहर की ज्यादातर कालोनियों व सोसायटियों में टीडीएस (टोटल डिजाल्व्ड सालिड्स) एक हजार लेकर तीन हजार से अधिक है। हुडा के सेक्टर, हाउसिंग सोसायटी में जाकर सप्लाई किए जा रहे पानी के नमूने लेकर उनका टीडीएस व पीएच की जांच की।

यहां की तस्वीरें डरावनी हैं और चेतावनी साफ है कि अगर जर्जर ढांचे को तुरंत दुरुस्त नहीं किया गया, तो संक्रमण का यह खतरा किसी भी दिन बेकाबू हो सकता है। जिन इलाकों में टीडीएस तीन हजार से अधिक है उनमें सेक्टर दो नाले के किनारे, अगवानपुर, आल्हापुर, फिरोजपुर, जाेधपुर रोड पंचवटी कालोनी। इसके अलावा कृष्णा कालोनी, आदर्श कालोनी, न्यू कालोनी, पैठ मोहल्ला, शेखपुरा, इंद्रपुरी, खैलकलां, सेक्टर दो में पानी का टीडीएस 15 सौ से दो हजार के बीच मिला।
कभी भी फूट सकता है बीमारी का बम

कृष्णा काॅलोनी, आदर्श काॅलोनी, शेखुपुरा, पैठ मोहल्ला सहित कई काॅलोनियों की गलियों और आसपास के क्षेत्रों में घरों तक पानी पहुंचाने के लिए जो छोटी पाइप लाइनें बिछाई गई हैं, वह भी गंदे पानी और नालियों के बीच से गुजर रही हैं। यहां अकसर लीक होने की स्थिति में दूषित पानी घरों तक पहुंचता रहता है। पैठ माेहल्ले की बुजुर्ग महिला जमुना, मंजू, दिगंबर व प्रदीप कुमार ने बताया कि यहां के लोग गटर का पानी पीने को मजबूर है।

आए दिन पानी में मरे हुए पक्षियों के पंख आते हैं। हमारी मोहल्ले में लोग डायरिया,पेट में दर्द की शिकायत बनी रहती है। गत दिवस न्यू कालोनी में भूरागिरी मंदिर के पीछे चार मरला कालोनी में गटर का पानी मिलकर सप्लाई हाे रही थी। इसका इंटरनेट मीडिया में खूब उछला था। जिसमें नल खोलते ही काला पानी निकल रहा था। उस पानी में बदबू भी आर रही थी। लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जन स्वास्थ्य विभाग के सप्लाई वाटर में भी खामी

पलवल शहर में पीने के लिए पानी ट्यूबवेल के माध्यम से जमीन से निकाला जाता है। जन स्वास्थ्य विभाग पानी की सप्लाई करता है वह भी पीने योग्य नहीं है। जन स्वास्थ्य विभाग अलग-अलग बोरिंग और डीप बोरिंग के जरिए निकाले गए पानी की सप्लाई करता है। पंप के जरिए निकाले गए पानी को फिल्टर या फ्यूरीफाई नहीं किया जाता। जिससे यह पानी भी पीने योग्य नहीं है।
इसलिए असंतुलित होता है टीडीएस

  • पहला कारण : शहर के सालिड वेस्ट को ट्रीटमेंट किये बगैर इन्हें या तो खुले में डंप कर दिया जाता है या फिर सीधे नदियों-नालों में डाल दिया जाता है।
  • दूसरा कारण : भूमिगत पानी का अत्याधिक इस्तेमाल भी पानी को प्रदूषित कर रहा है।
  • तीसरा कारण : केमिकल फर्टिलाइजर का बेतहाशा बढ़ता इस्तेमाल भी बड़े पैमाने पर पानी को प्रदूषित कर रहा है।
  • चौथा कारण : शहर के भू-जल स्तर में गिरावट भी पेयजल में बढ़ते टीडीएस की एक मुख्य वजह है।


“हमारे घर में गटर के पानी की सप्लाई हो रही है। नल खाेलते ही सुबह काला पानी आता है। उसके काफी देर बाद साफ पानी आता है। मगर उसमें भी बदबू आती हैं। इसलिए हमने ये पानी पीना बंद कर दिया है।“

-जमना देवी, पैठ मोहल्ला

“पिछले कई दिनों से हमारे यहां गंदे पानी का आपूर्ति की जा रही है।इसकी शिकायत गत सात दिसंबर को इसकी शिकायत की थी। मगर जेई कोई सही जवाब नहीं दिया। हमेशा टालमटोल कर रहे हैं। प्रशासन कुंभकरणी नींद सो रहा है।“

-कामिनी राणा, न्यू काॅलोनी

“पिछले एक साल से गंदे पानी आने से परेशान थे। गंदे पानी पीने के चलते मेरे तीनों पोते व पोती बीमार पड़ गए थे। इन्हें पीलिया, डायरिया हाेने के चलते अस्पताल में भर्ती रहे थे। अब हमने सबमर्सिबल पंप लगवा लिया है। सप्लाई का पानी पीना बंद कर दिया है।“

-लज्जा देवी


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