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1837 में अमेरिका के सिनसिनाटी शहर में विलियम प्रॉक्टर और जेम्स गैंबल नाम के दो लोगों ने इसकी शुरुआत की थी। आज इस कंपनी का रेवेन्यू करीब 6.8 लाख करोड़ रुपए है।
फिलहाल कंपनी चर्चा में है, क्योंकि भारत में सप्लाई चेन को बेहतर करने के लिए इसने 300 करोड़ रुपए के निवेश का ऐलान किया है। आज मेगा एंपायर में जानेंगे P&G के एंपायर बनने की कहानी…
विलियम प्रॉक्टर इंग्लैंड के रहने वाले थे। यहां उनकी गर्म कपड़ों की दुकान थी। 1832 में प्रॉक्टर की दुकान में एक रात चोरी हुई। चोरों ने लूट के बाद दुकान में आग भी लगा दी। सुबह जब प्रॉक्टर दुकान पर पहुंचे, तो सब खत्म हो चुका था। एक झटके में उनकी रोजी-रोटी का जरिया उजड़ गया था।
तब उन्होंने तब फैसला किया कि अब इंग्लैंड में नहीं रहेंगे। इस तरह 1832 में प्रॉक्टर अमेरिका आए और सिनसिनाटी में रहने लगे। यहीं उन्होंने कैंडल बनाने की दुकान शुरू की।
जेम्स गैंबल की भी अमेरिका आने की कहानी कुछ ऐसी ही है। 1819 में आयरलैंड में भयानक सूखा पड़ा। फसलें बर्बाद हो गईं। लोग भूख से मरने लगे। तब गैंबल वहां से अमेरिका चले आए और सिनसिनाटी शहर में बस गए।
अमेरिका आने के बाद दोनों ने अपना-अपना कारोबार शुरू किया। विलियम कैंडल बनाने लगे और गैंबल ने साबुन बनाने का बिजनेस शुरू किया। दोनों के बिजनेस छोटे थे।
लागत के मुकाबले कमाई कम होती थी। दोनों के बिजनेस के लिए कॉमन इंग्रेडिएंट की जरूरत पड़ती थी। वो थी जानवरों की चर्बी। सिनसिनाटी में ये आसानी से मिल जाता था।
तब अमेरिका के इस शहर में सुअरों के मांस का बिजनेस तेजी से बढ़ रहा था। कई लोग सिनसिनाटी को ‘पोर्कोपोलिस’ भी कहते थे।
उसी दौरान दोनों के ससुर अलेक्जेंडर नॉरिस ने सुझाया कि तुम दोनों को पार्टनरशिप कर लेनी चाहिए। दरअसल विलियम और गैंबल की पत्नियां आपस में बहन थीं। इसके बाद 31 अक्टूबर 1837 को दोनों ने मिलकर एक कंपनी बनाई और नाम P&G रखा।
सिविल वॉर की वजह से बाकी कंपनियों के काम बंद हुए, पर P&G का प्रोडक्शन बढ़ता रहा
दोनों के साथ मिलकर बिजनेस करने का फायदा भी हुआ। जल्द ही उनके प्रोडक्ट की मांग अमेरिका के दूसरे शहरों में भी बढ़ने लगी। इसमें भी कैंडल सबसे ज्यादा बिकता।
इसी बीच 1860 में अमेरिका में सिविल वॉर की शुरुआत होने वाली थी। ये युद्ध अमेरिका के ही उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच होना था।
इधर प्रॉक्टर और गैंबल को अपने प्रोडक्ट्स बनाने के लिए देवदार के पेड़ के गोंद की जरूरत पड़ती थी। ये कच्चा माल अमेरिका के दक्षिणी हिस्से से मंगाया जाता था। तब प्रॉक्टर और गैंबल के बेटे बड़े हो गए थे।
नॉरिस गैंबल और विलियम अलेक्जेंडर प्रॉक्टर ने युद्ध शुरू होने से पहले ही अमेरिका के दक्षिणी हिस्से न्यू ऑरलियन्स जाकर बड़ी मात्रा में देवदार के गोंद खरीद लिए।
जब युद्ध शुरू हुआ तब नॉर्थ अमेरिका की सभी कंपनियों के प्रोडक्शन पर असर पड़ने लगा, क्योंकि साउथ अमेरिका से कच्चा माल नहीं मिल पा रहा था।
दूसरी तरफ P&G का प्रोडक्शन पहले की तरह ही चालू रहा। कंपनी नॉर्थ अमेरिका की यूनियन आर्मी को साबुन और कैंडल बेचने लगी। इससे उसे अच्छी कमाई हुई। हालांकि, कुछ समय बाद P&G के पास भी कच्चे माल की कमी होने लगी।
तब कंपनी ने कैंडल बनाने की नई तकनीक इजाद की। साथ ही दूसरे नए प्रोडक्ट्स में हाथ आजमाना शुरू किया।
1875 में केमिस्ट हायर किया और प्रोडक्ट की एडवरटाइजमेंट करना शुरू किया
कंपनी ने 1875 में एक फुल टाइम केमिस्ट हायर किया। इसका काम जेम्स गैंबल के साथ साबुन सहित नए प्रोडक्ट्स पर काम करना था। तीन साल बाद कंपनी ने सफेद साबुन लॉन्च किया, जो मार्केट में हिट रहा।
इसी बीच विलियम प्रॉक्टर के बेटे हेनरी प्रॉक्टर ने सोचा कि प्रोडक्ट की क्वालिटी पर काम करने के साथ मार्केटिंग पर भी काम करने की जरूरत है।

हेनरी ने इसके लिए साबुन का नाम आइवरी से बदलकर Psalm 45 करने का सुझाव दिया। और कंपनी की तरफ से 11 हजार डॉलर का सलाना बजट भी अप्रूव करवाया। फिर प्रोडक्ट का स्लोगन रखा गया ‘99% प्योर’।
कर्मचारियों के लिए बेनिफिट प्रोग्राम शुरू किया
विलियम प्रॉक्टर के पोते विलियम कूपर प्रॉक्टर ने कंपनी की पॉलिसी में बड़े बदलाव किए। 1885 में कर्मचारियों को शनिवार को हाफ डे ऑफ देने का सुझाव दिया।
साथ ही वर्किंग शिफ्ट आठ घंटे फिक्स की। इसके बाद 1887 में कंपनी ने कर्मचारियों से प्रॉफिट शेयरिंग करना शुरू किया।
कूपर ने ही उन कर्मचारियों को बोनस देने की शुरुआत की जो अच्छा काम करते थे। 1915 में कंपनी ने सिकनेस डिसेबिलिटी प्रोग्राम शुरू किया। P&G को एम्पलॉई बेनिफिट प्रोग्राम शुरू करने वाली शुरुआती कंपनियों में से एक माना जाता है।
टाइड डिटर्जेंट ने कंपनी को दिलाई पहचान
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एक बार फिर से रॉ मटेरियल की कमी हुई, लेकिन उसके बाद कम्पनी ने खुद को संभाल लिया।
1946 में कंपनी ने एक नया प्रोडक्ट सिंथेटिक डिटर्जेंट Tide लॉन्च किया। इसके साथ ही ऑटोमेटिक वॉशिंग मशीन भी मार्केट में लॉन्च किया।
दोनों प्रोडक्ट हिट होंगे, कंपनी को इसकी उम्मीद नहीं थी। दोनों प्रोडक्ट को लोगों ने खूब पसंद किया। दूसरे देशों से लोग इसे ऑर्डर करने लगे। कहा जाता है कि इसने लोगों के कपड़े धोने का पूरा तरीका ही बदल दिया।
दो साल के अंदर Tide डिटर्जेंट में नंबर वन प्रोडक्ट बन गया। कंपनी ने इसके प्रचार पर भी 21 मिलियन डॉलर खर्च किया था। इसके बाद के सालों में कंपनी ने कई डिटर्जेंट लॉन्च किए।
इस तरह 1950 के बाद के पांच सालों में कंपनी ने खुद को हाइजिन और टॉयलेटरीज के बिजनेस में स्थापित कर लिया। इसी का नतीजा था कि P&G मार्केट में दूसरी छोटी कंपनियों को खरीदने लगी।1967 में लॉन्च हुआ Ariel भी इसी कंपनी का प्रोडक्ट है।
1985 में कंपनी ने Vicks खरीदा और दवाइयों के मार्केट में पैर जमाए
1981 में P&G ने दवाइयों के मार्केट में कदम रखा। 1982 में इसने पेप्टो बिस्मोल और क्लोरासेप्टिक बनाने वाली फार्मास्युटिकल कंपनी नॉर्विच-ईटन को खरीद लिया। इसके बाद 1985 में कंपनी ने रिचर्डसन-विक्स कंपनी को टेकओवर कर लिया।
साथ ही इसके रेस्पिरेटरी केयर प्रोडक्ट को अपने अंडर में ले लिया। तब ये डील 1.2 बिलियन डॉलर में हुई थी। इसके बाद कंपनी ने मोशन सिकनेस ट्रीटमेंट के लिए ड्रग Dramamine को भी टेकओवर किया।
2005 में Gillette खरीदकर यूनिलिवर को पछाड़ा
जनवरी 2005 में P&G ने रेजर ब्रांड Gillette को खरीद लिया। इस डील के बाद कंपनी यूनिलिवर को पछाड़कर दुनिया की सबसे बड़ी कंज्यूमर गुड कंपनी बन गई। इसके बाद कंपनी के पास Gillette रेजर सहित Duracell, Braun और Oral-B जैसे ब्रांड आ गए।
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