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राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को कोर्ट फीस एक्ट, 1870 में एक संशोधन पेश किया, जिससे वादियों को राहत मिलेगी।
इस बिल के पास होने से अब कोर्ट के बाहर समझौतों में भी कोर्ट फीस का पूरा रिफंड मिल सकेगा। दिल्ली के विधायी कार्यमंत्री प्रवेश वर्मा ने यह संशोधन बिल विधानसभा में पेश किया। बिल को बुधवार को सदन से पास किया जाएगा।
इस दौरान वर्मा ने कहा कि कोर्ट फीस एक्ट, 1870 और सिविल प्रोसीजर कोड (सीपीसी) की धारा 89 के तहत, जब भी कोई व्यक्ति कोर्ट जाता है तो उसे कोर्ट फीस जमा करनी होती है।
उन्होंने ने कहा कि पहले अगर कोर्ट के जरिए समझौता होता था तो कोर्ट फीस वापस कर दी जाती थी। हालांकि, अगर दोनों पक्ष आपसी सहमति से कोर्ट से बाहर मामला सुलझाते थे तो कोर्ट फीस का सिर्फ 50 प्रतिशत ही पैसा वापस किया जाता था।
2022 में हाई कोर्ट में दायर हुई थी जनहित याचिका
मंत्री ने बताया कि अब दिल्ली के लोगों को राहत मिलेगी क्योंकि यह तय किया गया है कि चाहे समझौता कोर्ट के जरिए हो या पक्षों के बीच आपसी सहमति से कोर्ट फीस का 100 प्रतिशत पैसा वापस किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट में प्रवीण कुमार अग्रवाल बनाम गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरेटरी ऑफ दिल्ली नाम से एक जनहित याचिका दायर की गई थी।
विधानसभा में पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने धारा 16ए को इस आधार पर चुनौती दी थी कि यह भेदभावपूर्ण है, क्योंकि यह उन मुकदमों के बीच एक अनुचित अंतर पैदा करती है जो कोर्ट द्वारा बताए गए तरीकों से विवादों को सुलझाते हैं। और जो अन्य कानूनी तरीकों से सौहार्दपूर्ण ढंग से विवादों को सुलझाते हैं। बाद में कानून विभाग ने मामले की जांच की और शुरुआती तौर पर मौजूदा प्रविधान में संशोधन की राय दी थी। |
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