प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। राज्य की राजधानी में वायु प्रदूषण का स्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। हर दिन सुबह और शाम वायु प्रदूषण इतना बढ़ जा रहा है कि लोग सांस लेने में तकलीफ महसूस कर रहे हैं।
कोहरे के कारण सड़कें भी दिखाई नहीं दे रही हैं। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) अस्वास्थ्यकर सीमा को पार कर रहा है। बीते कुछ दिनों से लगातार एक्यूआई 300 से ऊपर बना हुआ है।
भुवनेश्वर नगर निगम (बीएमसी) के लिए सबसे बड़ी चिंता लिंगराज थाना क्षेत्र बन गया है, जहां एक्यूआई सबसे अधिक दर्ज किया जा रहा है। यहां लगातार यह 400 के आसपास बना हुआ है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अक्टूबर से ही भुवनेश्वर में एक्यूआइ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, लेकिन चालू महीने में यह सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
1 जनवरी को भुवनेश्वर का एक्यूआई अधिकतम 405 दर्ज किया गया था। इसके बाद 2 से 6 जनवरी तक लगातार एक्यूआइ 337 से 382 के बीच रहा। बुधवार को भी सुबह वायु प्रदूषण का स्तर 360 से ऊपर था। दोपहर में कुछ कमी जरूर आई, लेकिन शाम होते-होते यह फिर बढ़ गया।
स्थिति पूरी तरह बिगड़ने से पहले भुवनेश्वर नगर निगम ने वायुमंडल में पानी का छिड़काव कर प्रदूषण कम करने की कोशिश शुरू की है। इसके लिए मिस्ट कैनन मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।
शुद्ध पानी का किया जा रहा स्प्रे
इन मशीनों के जरिए वातावरण में शुद्ध पानी का स्प्रे किया जा रहा है। खास तौर पर बस स्टैंड और अन्य प्रदूषण प्रभावित इलाकों में पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
इस कार्य के लिए दो मिस्ट कैनन मशीनें लगाई गई हैं। हालांकि 186 वर्ग किलोमीटर में फैले भुवनेश्वर नगर निगम क्षेत्र में इससे प्रदूषण कितना कम होगा, इसको लेकर आम लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं।
भुवनेश्वर में प्रदूषण बढ़ाने में निर्माण एजेंसियों की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इसी को देखते हुए बीएमसी ने इन पर सख्ती की है। निर्माण एजेंसियों को किन-किन नियमों का पालन करना होगा, इसे लेकर आयुक्त की ओर से आदेश जारी किया गया है।
जिन परियोजनाओं में अप्रोच रोड नहीं है, वहां पेवर ब्लॉक बिछाने का निर्देश दिया गया है। आसपास के इलाकों में वृक्षारोपण करने को भी कहा गया है। यह आदेश अपार्टमेंट, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, अस्पताल और अन्य संस्थानों पर लागू होगा।
जारी आदेश में कहा गया है कि भारी वाहनों से निर्माण सामग्री ले जाते समय ठेकेदारों को उसे ढककर ले जाना होगा। निर्माण स्थल से बाहर निकलने और प्रवेश से पहले वाहनों की नियमित और अच्छी तरह सफाई करनी होगी। धूल उड़ने से रोकने के लिए निर्माण स्थल को पूरी तरह ढककर रखना होगा।
परियोजना स्थल की खुली जगहों पर अस्थायी रूप से पेवर ब्लॉक बिछाने और नियमित पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। प्रदूषण नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।
नियमों का कड़ाई से करना होगा पालन
अगले आदेश तक इन नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। आदेशों का उल्लंघन करने पर बिल्डिंग प्लान रद्द कर दिया जाएगा और निर्माण कार्य बंद कर दिया जाएगा।
अतिरिक्त आयुक्त कैलाश चंद्र दास ने बताया कि प्रदूषण कम करने के लिए लिंगराज क्षेत्र समेत अन्य इलाकों में दो मिस्ट कैनन मशीनों से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। बीएमसी की साइन टीम और अन्य प्रवर्तन टीमों को प्रदूषण फैलाने वाली संस्थाओं पर नजर रखने के लिए तैनात किया गया है।
कई स्थानों पर छापेमारी भी की गई है। विभिन्न बस्तियों में आग जलाने पर रोक लगाई गई है और लोगों को जागरूक किया जा रहा है। वहीं, यांत्रिक सफाई के दौरान धूल न उड़े, इसके लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है। |
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