यमुना जलविद्युत परियोजना तथा लखवाड़ बांध परियोजना
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहराूदन। यमुना जलविद्युत परियोजना तथा लखवाड़ बांध परियोजना की भूमि को अन्य विभागों को सौंपे जाने के शासनादेश के विरोध में उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने विरोध किया। मोर्चा ने कहा कि अगर जमीन का हस्तांतरण किया गया तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
बुधवार को मोर्चा की एक बैठक उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड मुख्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केहर सिंह ने की, जबकि संचालन मोर्चा संयोजक इंसारूल हक ने किया। बैठक में उत्तराखंड जल विद्युत निगम द्वारा डाकपत्थर परियोजना की भूमि, भवनों व स्टोर्स को यूआईडीबी को हस्तांतरित किए जाने के शासनादेश पर चर्चा हुई।
मोर्चा पदाधिकारियों ने बताया कि यमुना परियोजना चरण-एक व चरण-दो के अंतर्गत छह विद्युत गृह लगातार बिजली उत्पादन कर रहे हैं। वहीं, लखवाड़ बांध परियोजना को विकसित किया जा रहा है।
मोर्चा का आरोप है कि गलत तथ्यों के आधार पर इन परियोजनाओं की भूमि को अन्य विभागों को सौंपने के आदेश जारी किए गए हैं। इस विषय में पूर्व में आंदोलन नोटिस दिया जा चुका है और पिछली वार्ता में प्रमुख सचिव ऊर्जा के साथ चर्चा का आश्वासन भी मिला था, लेकिन अब तक कोई बैठक नहीं कराई गई।
बैठक में मोर्चा प्रतिनिधिमंडल ने जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक डा. संदीप सिंघल एवं निगम के सभी निदेशकों के समक्ष दो टूक शब्दों में कहा कि यदि परियोजना भूमि या भवनों के हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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मोर्चा ने चेतावनी दी कि परियोजनाओं से जुड़ी भूमि पर स्कूल, मंदिर, गुरुद्वारा, अस्पताल सहित अनेक जनसुविधाएं विकसित हैं, जिनसे आसपास के हजारों परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। भूमि हस्तांतरण से न केवल विद्युत उत्पादन प्रभावित होगा, बल्कि क्षेत्र में सामाजिक व प्रशासनिक असंतुलन भी उत्पन्न होगा।
बैठक में यशवीर सिंह तोमर, प्रदीप कंसल, सुनील मोगा, पंकज सैनी, राजवीर सिंह, बीरबल सिंह, राकेश शर्मा, चित्र सिंह, डीएस रावत, राहुल चानना, सुनील तंवर, सुभाष, कलम सिंह चौहान, भानु प्रकाश जोशी, अशोक सैनी सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे। |