Manipur Violence: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के कथित 48 मिनट के ऑडियो रिकॉर्डिंग की पूर्ण फॉरेंसिक जांच के आदेश दिए है। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह ऑडियो क्लिप 2023 में मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा में पूर्व मुख्यमंत्री की भूमिका की ओर इशारा करता है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU), गांधीनगर को सौंपी है।
क्या है कोर्ट का आदेश?
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि केवल चुनिंदा हिस्से नहीं, बल्कि पूरी 48 मिनट की बातचीत और बीरेन सिंह के \“स्वीकृत वॉयस सैंपल\“ को फॉरेंसिक तुलना के लिए भेजा जाए।NFSU से इस प्रक्रिया में तेजी लाने और अंतिम रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सीधे कोर्ट को सौंपने को कहा गया है। इससे पहले NFSU ने कुछ क्लिप्स को \“छेड़छाड़ किया हुआ\“ बताया था, लेकिन याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने एक अलग फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि रिकॉर्डिंग का एक हिस्सा पूरी तरह अनएडिटेड है।
यह याचिका कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (KOHUR) द्वारा दायर की गई है। KOHUR की तरफ से प्रशांत भूषण ने कोर्ट में तर्क दिया। आरोप है कि रिकॉर्ड की गई बातचीत प्रथम दृष्टया कुकी-जो समुदाय के खिलाफ हिंसा में राज्य मशीनरी की मिलीभगत और भागीदारी को दर्शाती है। याचिका में दावा किया गया है कि बीरेन सिंह ने कुकी-बहुल क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हत्या और तबाही को संगठित करने और निर्देशित करने में भूमिका निभाई थी।
मणिपुर हिंसा का घटनाक्रम
मई 2023 में इंफाल घाटी के मैतेई और पहाड़ी क्षेत्रों के कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़की थी। इसके पीछे की वजह मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग के विरोध में आयोजित \“ट्राइबल सॉलिडेरिटी मार्च\“ था जिसके बाद झड़पें शुरू हुईं। इस हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। आंतरिक दबाव और नेतृत्व परिवर्तन की मांग के बीच एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट अब इस स्वतंत्र फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ऑडियो असली है या नहीं। अगर ऑडियो की सत्यता प्रमाणित होती है, तो यह पूर्व मुख्यमंत्री और तत्कालीन राज्य सरकार के लिए गंभीर कानूनी संकट पैदा कर सकता है। KOHUR ने इस मामले में एक स्वतंत्र विशेष जांच दल से जांच की भी मांग की है।