स्कूल शिक्षक (प्रतीकात्मक चित्र)
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं के सुचारु संचालन के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख शिक्षक और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारी अब अत्यावश्यक सेवा अधिनियम (ESMA) के दायरे में आ गए हैं। इसके तहत आगामी दो महीनों तक छुट्टियों पर रोक रहेगी और परीक्षा से जुड़े किसी भी कार्य से इन्कार करना कानूनन अपराध माना जाएगा।
1 फरवरी से 30 अप्रैल तक लागू रहेगा ESMA
शासन के आदेश के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) ने इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। ये आदेश प्रदेश के सभी स्कूलों के प्राचार्यों को भेजे गए हैं। ESMA की यह व्यवस्था 1 फरवरी से 30 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी और इस अवधि में बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े सभी कार्य अनिवार्य होंगे।
परीक्षा ड्यूटी से इन्कार नहीं कर सकेंगे शिक्षक
आदेश के अनुसार परीक्षा संचालन, पर्यवेक्षण, उत्तरपुस्तिकाओं का प्रबंधन, मूल्यांकन सहित सभी जिम्मेदारियां अत्यावश्यक सेवा की श्रेणी में रहेंगी। इस दौरान कोई भी शिक्षक या कर्मचारी ड्यूटी से मना नहीं कर सकेगा। यदि कोई कार्य में बाधा डालता है या ड्यूटी से इन्कार करता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा और उस पर कार्रवाई हो सकती है।
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7 फरवरी से शुरू होंगी बोर्ड परीक्षाएं
प्रदेश में 7 फरवरी से मप्र बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं, जो 13 मार्च तक चलेंगी। इन परीक्षाओं में करीब 17 लाख विद्यार्थी शामिल होंगे। प्रदेशभर में लगभग 4,000 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां बड़ी संख्या में शिक्षकों और कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।
इसलिए उठाया कदम
मंडल अधिकारियों के अनुसार, हड़ताल, धरना, प्रदर्शन या अवकाश के कारण परीक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो, इसी उद्देश्य से शिक्षकों की सेवाओं को ESMA के तहत लाया गया है। इस आदेश का सख्ती से पालन कराने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारियों को सौंपी गई है। |
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