प्रतीकात्मक तस्वीर।
जगरण संवाददाता, भागलपुर। फार्मर रजिस्ट्री व ई-केवाइसी की रैंकिंग मामले में भागलपुर दूसरे से तीसरे स्थान पर आ गया है। मुजफ्फरपुर पहले स्थान पर है और पूर्वी चंपारण दूसरे स्थान पर है। कटिहार छठे, अररिया 15वें, सहरसा 21वें, पूर्णिया 22वें, मधेपुरा 25वें, जमुई 26वें, बांका 27वें, सुपौल 28वें, किशनगंज 31वें, मुंगेर 33वें, खगड़िया 34वें, लखीसराय 37वें स्थान पर है। इसको देखते हुए जिलाधिकारी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। जिलाधिकारी खुद प्रखंडों में जाकर फार्मर रजिस्ट्री व ई-केवाइसी की स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
उपविकास आयुक्त के स्तर से लगातार मानीटरिंग की जा रही है। केवाइसी एवं फार्मर रजिस्ट्री कराने से किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, बीज अनुदान, फसल सहायता, कृषि यंत्र अनुदान सहित अन्य सरकारी कृषि योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा। बिना केवाइसी एवं रजिस्ट्री वाले किसानों को किसी भी योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। फार्मर आइडी से किसानों के जमीन से संबंधित पूरी जानकारी रहेगी। काम के महत्व को देखते हुए बिना सूचना के छुट्टी पर रहने वाले एक कृषि समन्वयक को निलंबित कर दिया गया है।
प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि योजना के लिए हुआ आवश्यक
अनुमण्डल कृषि पदाधिकारी, कहलगांव के प्रतिवेदन में बताया गया कि पंचायत-ओगरी, लगमा एवं वंशीपुर के कृषि समन्वयक कुमार सदाशिव के द्वारा 31 दिसंबर से एक जनवरी तक आवेदन देकर एवं दो जनवरी से आजतक बिना किसी सूचना के ई-केवाइसी जैसे महत्वपूर्ण कार्य से पंचायत मुख्यालय से अनुपस्थित पाए गए हैं। इस संदर्भ में प्रखण्ड कृषि पदाधिकारी, कहलगांव द्वारा दो जनवरी एवं चार जनवरी को स्पष्टीकरण की मांग की गई थी, लेकिन कुमार द्वारा स्पष्टीकरण का कोई जवाब नहीं दिया गया है।
फार्मर रजिस्ट्री मामले में लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई शुरू
इसे अनुमंडल कृषि पदाधिकारी ने खेदजनक, स्वेच्छाचारिता, कर्त्तव्यहीनता, उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना एवं एग्री स्टैक परियोजना अन्तर्गत फार्मर रजिस्ट्री के प्रगति कार्य में जान-बूझकर बाधा उत्पन्न करने, जो बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली 1976 नियम 3 (1) का उल्लंघन बताया है। छह जनवरी को उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एग्री स्टैक परियोजना अन्तर्गत फार्मर रजिस्ट्री के प्रगति की समीक्षा के क्रम में अनाधिकृत रूप से फार्मर रजिस्ट्री के कार्यों में अनुपस्थित रहने एवं लापरवाही बरतने के फलस्वरूप विभागीय कार्रवाई करने का दिए गए निर्देश के आलोक में अनुमण्डल कृषि पदाधिकारी, कहलगांव द्वारा विभागीय कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई।
ओगरी, लगमा व वंशीपुर पंचायत के कृषि समन्वयक निलंबित
अनुमण्डल कृषि पदाधिकारी, कहलगांव द्वारा लगाए गए आरोप एवं अनुशंसा के आलोक में जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा कृषि समन्वयक कुमार सदाशिव को निलंबित करते हुए कहा है कि एग्री स्टैक परियोजना अन्तर्गत फार्मर रजिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण कार्य में अभिरूचि नहीं लेने एवं कार्य क्षेत्र से अनुपस्थित रहने के आरोप में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के नियम 9 (1) के तहत तत्कालिक प्रभाव से निलंबित किया जाता है। निलंबन अवधि में कुमार सदाशिवका मुख्यालय अनुमण्डल कृषि कार्यालय, नवगछिया निर्धारित किया जाता है। निलंबन मुख्यालय से निर्गत अनुपस्थिति विवरणी के आधार पर नियमानुसार जीवन निर्वहन भत्ता अनुमान्य होगा। अरोप पत्र अलग से निर्गत किया जाएगा।
किसानों के ई केवाईसी और एफआर अभियान का डीएम ने किया निरीक्षण
जिलाधिकारी डा. नवल किशोर चौधरी द्वारा प्रखंड कृषि कार्यालय, गोराडीह का भ्रमण कर वहां चल रहे किसानों का ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्रेशन (एफआर) कार्य का निरीक्षण किया। वह किसानों से वार्ता कर ई-केवाइसी तथा एफआर कार्य की गति का फीडबैक लिया। सभी प्रखंडों में, सभी पंचायतों में किसान सलाहकार, राजस्व कर्मचारी और कृषि संबंधवायक द्वारा प्रत्येक किसान का ई-केवाइसी और एफआर किया जा रहा है। ई-केवाइसी और एफआर पीएम-किसान सम्मान निधि और अन्य कृषि सेवाओं को सुचारू रूप से प्राप्त करने के लिए ज़रूरी है। जिसमें आधार प्रमाणीकरण के ज़रिए पहचान सत्यापन किया जाता है। एफआर, आधार और भूमि रिकार्ड को जोड़कर एक डिजिटल डेटाबेस बनाता है, जिससे पारदर्शिता आती है और योजनाओं के वितरण में आसानी होती है। इसके लिए आधार और मोबाइल नंबर आवश्यक है। |