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एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली: कुछ देश अपनी अनोखी परंपरा, संस्कृति और खान-पान के लिए पूरी दुनिया में मशहूर होते हैं। लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं, जो अपनी अजीबों-गरीब पंरपराओं और खान-पान के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं देशों में से एक देश ऐसा भी है, जहां लोग ब्रेड के साथ मिट्टी भी खाते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं ईरान में स्थित होर्मुज आइलैंड की।
भले ही यह बात आपको सुनने में अजीब लग रही हो। लेकिन यहां ब्रेड व अन्य पारंपरिक खाने के साथ प्लेट में मिट्टी भी परोसकर दी जाती है। अपनी इसी अटपटी परंपरा के कारण यह द्वीप तमाम वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए एक रोचक विषय बना हुआ है।
दरअसल ईरान के होर्मुज में ब्रेड व अन्य चीजों के साथ मिट्टी खाने की परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है। इसके साथ ही इस आइलैंड की एक खास बात यह भी है कि इसका रंग मंगल ग्रह की तरह दिखाई देता है। ऐसे में आज इस लेख के माध्यम से हम आपको बताएंगे कि आखिर इस आईलैंड के लोग मिट्टी क्यों खाते हैं। साथ ही यह आईलैंड पर्यटकों के लिए एक आकर्षित क्रेंद क्यों बना हुआ है।
कहां स्थित है ये आइलैंड
ईरान का यह अनोखा आइलैंड दक्षिण में फारस की खाड़ी पर स्थित है। यह आईलैंड रैनबो आईलैंड के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल यहां मौजूद पहाड़ और नदिया इंद्रधनुष की तरह दिखाई देती है, जिसमें लाल, पीला, नारंगी, बैंगनी और सफेद रंग प्रमुख है। यही नहीं यहां जमीन और पहाड़ों के कम से कम 70 से ज्यादा रंग पाए जाते हैं। साथ ही यह आईलैंड अपनी लाल मिट्टी के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
क्यों खाते हैं यहां के लोग मिट्टी
ईरान के इस आईलैंड में मिट्टी मसाले के तौर पर खाई जाती है। इस आईलैंड की यही अनोखी बात दुनिया भर के अलग-अलग कोने से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करती है। दरअसल इस मिट्टी की एक खासियत है कि यह खनिज से भरपूर होती है। तमाम रिपोर्ट के मुताबिक यहां पाई जाने वाली मिट्टी में आयरन और 70 प्रतिशत खनिज पाया जाता है। यहां के स्थानीय लोग इसे ब्रेड या मछली के साथ खाते हैं। इस मिट्टी का स्वाद हल्का नमकीन और हल्का मीठा बताया जाता है।
सैकड़ों साल पुरानी है परंपरा
ईरान के होर्मुज आइलैंड में मिट्टी खाने की परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है। दरअसल आज से सैकड़ों साल पहले जब नमक और मसाले आसानी से उपलब्ध नहीं होते थे। तब यहां के लोग इसका स्वाद बढ़ाने के लिए मिट्टी का इस्तेमाल किया करते थे। साथ ही इस मिट्टी में खनिज भरपूर मात्रा में भी पाया जाता है। इसलिए लोग इसका इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने और खनिज की पूर्ति को पूरा करने के लिए किया करते थे।
मिट्टी ले जाने पर प्रतिबंध
भूवैज्ञानिक रूप से यह जगह बेहद ही संवेदनशील मानी जाती है। यहां के स्थानीय लोग इस आईलैंड को अपनी धरोहर के रूप में देखते हैं। इसलिए सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा यहां की मिट्टी और पत्थर ले जाने पर पूरी तरह से मनाही है। इसके साथ ही जब पर्यटक इस जगह का दौरा करते हैं, तो उन्हें भी सख्त निर्देश दिए जाते हैं, ताकि प्राकृतिक संसाधनों को कोई नुकसान न हो।
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