एसआईआर निगरानी समितियों को लेकर कांग्रेस की किरकिरी। (फाइल फोटो)
जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। कांग्रेस ने देशभर के साथ उत्तर प्रदेश में भी हुंकार भरी है कि वह कथित वोट चोरी रोकने के लिए जमीनी स्तर पर लड़ाई लड़ेगी। इसके लिए बकायदा जिला स्तर पर एसआईआर निगरानी समितियां भी घोषित कर दीं, लेकिन क्या कोई विश्वास कर सकता है कि पार्टी ने अपने मुख्य चुनावी एजेंडे का काम ऐसे नेताओं के भी हाथों में सौंप दिया है, जो दिवंगत हो चुके हैं, जो बहुत उम्रदराज या बीमार होने के कारण लगभग निष्क्रिय हैं या कांग्रेस की नीतियों से असहमत होकर पार्टी ही छोड़ चुके हैं।
जी हां, हाल ही में जारी कांग्रेस की सूची का सच तो यही है। हालांकि, संगठन की सक्रियता की इस तरह कलई खुलने और छीछालेदर होने के बाद अब स्थानीय नेताओं पर इस गलती का ठीकरा फोड़कर समितियों में बदलाव का दावा किया जा रहा है।
कांग्रेस की सूची में दिवंगत नेताओं के नाम
इसी क्रम में बुधवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की ओर से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अनुमति से उत्तर प्रदेश में एसआईआर की निगरानी के लिए वरिष्ठ कांग्रेसियों की जिला स्तरीय समितियों की घोषणा कर दी। जब सूची जारी हुई तो उसे देखकर कई कांग्रेसी ही सन्न रह गए। इसका कारण यह है कि मऊ से पार्टी ने पूर्व विधायक जगदीश मिश्रा को शामिल कर दिया, जो कि अब इस दुनिया में नहीं हैं। 96 वर्ष की आयु पूर्ण कर वह दिवंगत हो चुके हैं।
मऊ से नसीम अहमद का नाम
मऊ से ही दूसरा नाम पूर्व विधायक नसीम अहमद का रखा गया। बसपा से कांग्रेस में आए नसीम जुलाई में कांग्रेस छोड़कर चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी में शामिल हो चुके हैं। वहीं, संत कबीर नगर से पूर्व सांसद केसी पांडेय को एसआईआर की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया, लेकिन स्थानीय नेताओं के अनुसार, केसी पांडेय वयोवृद्ध हैं और उनकी मनोदशा ही ठीक नहीं है।
इसी जिले से दूसरा नाम पूर्व विधायक अफसर यू अहमद का है। बताया गया है कि वह भी काफी बुजुर्ग हो जाने के कारण अब राजनीति में सक्रिय नहीं हैं। ऐसा ही उदाहरण जौनपुर से कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह मुन्ना का है। वह अधिक उम्र के कारण अस्वस्थ रहते हैं। लगभग दो माह पहले स्वयं प्रदेश अध्यक्ष अजय राय उनका हालचाल लेने पैतृक गांव पहुंचे थे।
गोंडा से रघुराज प्रसाद उपाध्याय का नाम
वहीं, गोंडा के पूर्व विधायक रघुराज प्रसाद उपाध्याय काफी समय से बीमार हैं। अब वह अधिकतर लखनऊ में ही रहते हैं। उनसे भी पार्टी गोंडा में एसआईआर की निगरानी की उम्मीद करती है, क्योंकि समिति की घोषणा वाले पत्र में उल्लेख है कि जिले में रहकर एसआईआर की निगरानी करनी होगी।
यह कुछ उदाहरण हैं, वैसे सूत्रों के कहना है कि बहुत से नेता निष्क्रिय, वृद्ध या अस्वस्थ हैं। ऐसे में समझा जा सकता है कि धरातल पर कांग्रेस के संगठन की स्थिति क्या है।
मामले पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता डॉ. उमाशंकर पांडेय ने कहा, \“\“सूची जारी होने के कुछ समय बाद ही गलती का संज्ञान ले लिया गया। नाम भेजने वाले स्थानीय नेताओं ने माना है कि मानवीय त्रुटि हो गई। दिवंगत, अस्वस्थ और पार्टी छोड़ चुके नेताओं के स्थान पर अन्य सक्रिय नेताओं की नियुक्ति कर दी गई है।\“\“
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