दिल्ली हाई कोर्ट ने दुष्कर्म FIR रद्द करने से किया इनकार।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। 27 वर्षीय महिला वकील के साथ बार-बार दुष्कर्म करने व मारपीट के मामले में दोनों पक्षों के बीच समझौते के आधार पर प्राथमिकी को रद करने से इनकार करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि जनता से जुड़े मामलों को सिर्फ आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच समझौते के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता। साथ ही न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने आरोपी 51 साल के वकील की तरफ से दायर केस रद करने और अग्रिम जमानत देने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
अरोपी वकील पर 27 साल की एक महिला वकील के साथ बार-बार दुष्कर्म और मारपीट करने के साथ ही न्यायिक अधिकारियों के जरिए उसे प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप है।
अदलात ने उक्त टिप्पणियां तब की जब आरोपी वकील की तरफ से पेश हुए वकील अभिमन्यु भंडारी ने बताया कि उनके मुवक्किल और शिकायतकर्ता ने आपसी सहमति से विवाद सुलझा लिया है और 29 नवंबर को एक मेमोरेंडम आफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया हैं। यह भी बताया कि महिला ने कहा कि उसे अब कोई शिकायत नहीं है।
पीठ ने कहा कि इस मामले में जनहित जुड़ा है और क्योंकि इसकी वजह से दो ज्यूडिशियल अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और दिल्ली हाई कोर्ट ने उनमें से एक को निलंबित कर दिया था।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में लिए गए प्रशासनिक फैसले में वह भी शामिल थे, इसलिए वे इस मामले से खुद को अलग करते हैं। इससे पहले 29 अगस्त को एक पूर्ण कोर्ट की बैठक में हाई कोर्ट ने जिला जज संजीव कुमार सिंह को निलंबित कर दिया था और महिला की शिकायत के आधार पर उनके और एक अन्य जज अनिल कुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी।
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