रामगढ़ नगर परिषद चुनाव। (जागरण)
देवांशु शेखर मिश्र, रामगढ़। नगर परिषद चुनाव में अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति की महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित होने की घोषणा ने रामगढ़ की चुनावी फिजा ही बदल गई है।
शुक्रवार दिन तक अपनी उम्मीदवारी के लिए ताल ठोंक रहे दर्जन भर से अधिक संभावित उम्मीदवारों के अरमानों पर इस माघ महीने में ठंडा पानी फिर गया।
शुक्रवार को राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी की गई अधिसूचना ने कई लोगों का दिल तोड़ दिया। विभिन्न दलों से दावा करने वाले संभावित उम्मीदवारों की लंबी फेहरिस्त थी। चाहे भाजपा हो या आजसू या कांग्रेस या फिर झामुमो या जेएलकेएम सहित कई दलों व अन्य संगठनों से संभावित उम्मीदवार लगातार दावे कर रहे थे।
दोपहर बाद जैसे ही अधिसूचना जारी हुई इस ठंड के माैसम में आइ इस खबर ने अचानक से गर्मी का अहसास करा दिया। देर शाम से ही चुनावी अधिसूचना के बाद से दुखी संभावित उम्मीदवार गम भुलाने के लिए अंगूर की बेटी का सहारा लेते रहे तो कई घरों में ही बैठ गए।
क्षेत्र के विभिन्न लाइन होटलों में बैठ कर गम भुलाने के लिए लगातार सरकार व राज्य निर्वाचन आयोग को कोसते रहे। माघ महीने में पड़ रही ठंड के बावजूद लगातार वार्डों में जनसंपर्क चला रहे ऐसे चुनाव लड़ने के अरमान पाल रखे कई उम्मीदवारों ने अधिसूचना के बाद से अपना मोबाइल ही बंद कर लिया।
वैसे पिछली बार भी रामगढ़ नगर परिषद का अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति अन्य के लिए आरक्षित था। पिछली बार आजसू पार्टी की ओर से अध्यक्ष पद पर युगेश बेदिया चुनाव जीते थे।
अगर चर्चा भाजपा की ओर से करें तो कई लोग जो जिला अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे थे। जब वे जिला अध्यक्ष नहीं बन पाए तो वे इतना संतोष कर रहे थे कि चलो भले ही जिला अध्यक्ष नहीं बन पाए, लेकिन अब नगर परिषद चुनाव में ही पार्टी की ओर से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे लेकिन एक ही दिन दो-दो झटके किसी बड़ी चोट से कम नहीं थी, दोनों ओर से हाथ खाली रहे।
स्थिति भी ऐसी कि न माया मिली न राम। कुछ यही स्थिति कांग्रेस पार्टी की भी थी, इस दल से भी कई उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए समय-समय पर अपनी दावेदारी कर रहे थे। इसको लेकर पार्टी स्तर पर भी लगातार अपनी दावेदारी जता रहे थे, लेकिन सब कुछ उलट हो गया।
इस बार के विधानभा चुनाव में अचानक से अप्रत्याशित प्रदर्शन करने वाले जेएलकेएम से भी कई उम्मीदवारों के नाम सामने आ रहे थे।
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