ईरान में नहीं थम रहे विरोध प्रदर्शन। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में शुक्रवार को लगातार तेरहवें दिन सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी रहे। यह एक देशव्यापी अशांति की एक लहर है और सालों में शासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। गुरुवार को ईरान में इंटरनेट बंद कर दिया गया और टेलीफोन की लाइनें भी काट दी गईं, जिसके बाद ये देश बाहरी दुनिया से पूरी तरह से कट गया। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से दर्जनों लोग मारे गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर सुरक्षा बल ताकत का इस्तेमाल करते हैं तो वह ईरान पर हमला करेंगे। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रंप से अपने देश पर ध्यान देने बात कहकर पलटवार किया और विरोध प्रदर्शनों को भड़काने के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया है। जैसे-जैसे लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे प्रदर्शन प्रदर्शन भी तेज होते जा रहे हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे की कहानी-
विरोध प्रदर्शन किस वजह से शुरू हुए?
दरअसल, ये विरोध प्रदर्शन तेहरान के बाजारों में बढ़ती महंगाई को लेकर शुरू हुए थे, लेकिन अब ये पूरे देश में फैल गए हैं और सरकार के खिलाफ आम विरोध प्रदर्शन में बदल गए हैं। पिछले हफ्ते महंगाई को लेकर चिंताएं तब बढ़ गईं, जब खाने-पीने की जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतें रातों-रात अचानक बढ़ गईं और कुछ प्रोडक्ट तो दुकानों से पूरी तरह गायब हो गए।
हालात तब और खराब हो गए जब सेंट्रल बैंक ने एक ऐसे कार्यक्रम को खत्म करने का निर्णय लिया, जिससे कुछ आयातकों को बाकी मार्केट की तुलना में सस्ते अमेरिकी डॉलर मिल रहे थे। इसकी वजह से कुछ दुकानदारों ने सामान की कीमतें बढ़ा दीं तो कछ ने दुकानें ही बंद कर दीं और इसके बाद से प्रदर्शन शुरू हो गया। सरकार ने हर महीने लगभग 7 डॉलर कैश मदद देकर दबाव कम करने की कोशिश की लेकिन यह नाकाम कदम साबित हुआ।
कितने बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध प्रदर्शन?
हालिया विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद से बड़े पैमाने पर हो रहे हैं, जब पुलिस हिरासत में 22 साल की महसा अमिनी की मौत हो गई थी और \“औरत, जिंदगी, आजादी\“ को लेकर प्रदर्शन हुआ था। लगभग दो हफ्ते पहले शुरू हुए इन प्रदर्शनों में 100 से ज्यादा शहरों के लोगों ने हिस्सा लिया है।
विरोध प्रदर्शन ईरान के पश्चिमी प्रांतों तक फैल गए हैं। इराक की सीमा से लगा कुर्द-बहुल इलाका इलम और लोरेस्टान, ये दोनों ही अशांति वाले हॉटस्पॉट बन गए हैं। जातीय विभाजन और गरीबी से भड़की भीड़ ने सड़कों पर आग लगा दी और खामेनेई मुर्दाबाद के नारे लगाए। ये सीधे तौर पर खामेनेई को चुनौती थी।
ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स ने बताया कि विरोध प्रदर्शनों में 950 पुलिसकर्मी और पैरामिलिट्री बासिज फोर्स के 60 जवान घायल हुए हैं। नॉर्वे के ईरान ह्यूमन राइट्स एनजीओ (IHRNGO) ने गुरुवार को बताया कि प्रदर्शन शुरू होने के बाद से कम से कम 45 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, जिनमें आठ बच्चे भी शामिल हैं। उसने बताया कि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं और 2,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।
इस बार का विरोध प्रदर्शन कैसे अलग है?
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के विरोध प्रदर्शन बाजारियों ने शुरू किए, जो ईरान के इतिहास में बदलाव लाने वाली एक ताकतवर शक्ति हैं और जिन्हें सरकार के प्रति वफादार माना जाता है।
ईरान में बाजारियों और धर्मगुरुओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे गठबंधन ने ईरान के इतिहास में दुकानदारों को किंगमेकर के तौर पर अहम भूमिका निभाने का मौका दिया। उन्हीं धर्मगुरुओं को मिले उनके समर्थन की वजह से 1979 की इस्लामिक क्रांति सफल हो पाई, जिससे विद्रोहियों को आर्थिक मदद मिली और शाह, यानी राजा का पतन हुआ।
एक बड़ी राजनीतिक ताकत के तौर पर उनकी भूमिका ज्यादा प्रतीकात्मक हो गई, लेकिन करेंसी में उतार-चढ़ाव का उनके बिजनेस पर जो असर हुआ, उसी वजह से उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू किए जो बाद में जानलेवा हो गए।
अधिकारियों ने आर्थिक प्रदर्शनकारियों और सत्ता परिवर्तन की मांग करने वालों के बीच फर्क करने की भी कोशिश की है। सत्ता परिवर्तन की मांग करने वालों को दंगाई और विदेशी समर्थित किराए के सैनिक बताया है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का वादा किया है।
ईरान को कौन चलाता है और इसका शासन के लिए क्या मतलब है?
ईरान 1979 से एक धर्मतंत्र का हिस्सा रहा है। धर्मगुरुओं ने पश्चिम के साथ गठबंधन वाले एक सेक्युलर राजा को हटा दिया और खोमैनी के नेतृत्व में इस्लामिक रिपब्लिक बना। मसूद पेजेशकियन को 2024 में राष्ट्रपति तो चुना गया और उन्होंने प्रैक्टिकल विदेश नीति को बढ़ावा भी दिया, लेकिन उनकी शक्तियां सीमित हैं और सभी बड़े सरकारी मामलों पर खामेनेई ही फैसले लेते हैं।
कड़े प्रतिबंधों और अमेरिका और इजरायल के साथ संभावित नए युद्ध जैसे बाहरी कारणों ने देश को डरा दिया है और जनता चिंतित है। दिवंगत शाह के निर्वासित बेटे रजा पहलवी ने खुद को मौजूदा सरकार के एक अच्छे विकल्प के तौर पर पेश किया है। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों को समर्थन दिया है और पूरे देश में मिलकर कार्रवाई करने के लिए सीधे अपील की है।
ट्रंप और खामेनेई ने क्या कहा?
ट्रंप ने तेहरान को कई बार चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। गुरुवार को ट्रंप ने कहा, “मैंने उन्हें बता दिया है कि अगर वे लोगों को मारना शुरू करते हैं, जैसा कि वे अपने दंगों के दौरान करते हैं... तो हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे।“
इसके अगले दिन ट्रंप ने तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ एक मीटिंग में दोहराया कि बेहतर होगा कि ईरानी अधिकारी गोलीबारी शुरू न करें, क्योंकि हम भी गोलीबारी शुरू कर देंगे, लेकिन अमेरिका उनकी जमीन पर अपने सैनिक नहीं भेजेगा। पिछले हफ्ते ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मिलने के कुछ दिनों बाद ट्रंप ने नए हमलों की संभावना जताई थी।
उधर, प्रदर्शन शुरू होने के बाद अपने पहले सार्वजनिक बयान में खामेनेई ने ट्रंप से कहा कि वे अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें। उन्होंने कहा, “कुछ आंदोलनकारी ऐसे हैं जो पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करना चाहते हैं। एकजुट ईरानी लोग सभी दुश्मनों को हरा देंगे।“ खामेनेई ने आगे कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक उन लोगों के सामने पीछे नहीं हटेगा जो हमें खत्म करना चाहते हैं।“
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