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बच्चा चोर की अफवाह से सहमा बांका जिला, पुलिस बोली- कोई ठोस प्रमाण नहीं

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बच्चा चोर की अफवाह से सहमा बांका जिला, पुलिस बोली- कोई ठोस प्रमाण नहीं



संवाद सूत्र, बांका। जिले में बीते एक सप्ताह से बच्चा चोर की अफवाहों ने लोगों की दिनचर्या और मानसिक शांति को प्रभावित कर दिया है। बांका शहर के विजयनगर चौक, लकड़ीकोला गांव, अमरपुर के जगत पोखर, मादाचक, शंभूगंज बाजार, रजौन का पुनसिया बाजार, बाराहाट जैसे इलाकों में सामने आई घटनाओं ने भय का माहौल बना दिया।

कहीं बच्चों को चॉकलेट देकर बहलाने की बात फैली तो कहीं अनजान युवती या भिखारी को बच्चा चोर समझ लिया गया। कई जगह भीड़ ने संदिग्ध मानकर लोगों को पकड़ लिया, पूछताछ की और कुछ मामलों में मारपीट भी की।

पुलिस जांच में अब तक बच्चा चोरी या प्रयास का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। बावजूद इसके अफवाहों ने समाज के कमजोर तबके भिखारी, प्रवासी और जरूरतमंद लोगों को संदेह के घेरे में ला दिया है। अभिभावक बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं।
केस स्टडी–वन:

21 फरवरी को शंभूगंज बाजार स्थित असर्फी स्कूल के पास एक महिला द्वारा बच्चों को चॉकलेट देने की चर्चा से अफरातफरी मच गई। भागने के क्रम में एक बच्ची का हाथ क्रेक कर गया था। पर महिला का पता नहीं चला।
केस स्टडी–टू:

19 फरवरी को लकड़ीकोला गांव में खेत से मिली युवती को बच्चा चोर समझकर कुछ लोगों ने मारपीट की। बाद में पुलिस जांच में आरोप निराधार निकले।
केस स्टडी–थ्री:

23 फरवरी को विजयनगर चौक पर एक युवती को शक के आधार पर पकड़ा गया, जिसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
केस स्टडी–फोर:

अमरपुर के जगत पोखर में एक महिला को बच्चा चोर समझकर भीड़ ने घेर लिया। उसके साथ मारपीट भी की गई। परंतु कोई प्रमाण नहीं मिला।
लोगों की राय


अफवाह के आधार पर कानून हाथ में लेना गंभीर अपराध है। पांच या अधिक लोगों द्वारा हमला करने पर पीड़ित व्यक्ति की मौत पर आजीवन कारावास तक का प्रविधान है। किसी को भी कानून को हाथ में नहीं लेना चाहिए। - मनीष कुमार, अधिवक्ता

अब तक बच्चा चोरी की किसी भी घटना का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है। इसके बावजूद अफवाहों के कारण समाज के कमजोर और दबे-कुचले वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। समाज को संवेदनशील और जिम्मेदार बनने की जरूरत है। - प्रिया मिश्रा, सामाजिक कार्यकर्ता


वहीं, शिक्षक राजीव रंजन ने कहा कि अफवाहें समाज में डर और अविश्वास का माहौल पैदा करती हैं। जिसका सीधा असर बच्चों और परिवारों पर पड़ता है। आज स्थिति यह है कि माता-पिता बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं। शिक्षक होने के नाते हमारा दायित्व है कि हम लोगों को जागरूक करें। बिना प्रमाण किसी को दोषी मान लेना गलत है।

शिक्षक विभाकर कुमार विभा ने बताया कि भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। बल्कि इससे हालात और बिगड़ते हैं। अफवाहों पर विश्वास करने के बजाय लोगों को प्रशासन और कानून व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए।


बच्चा चोरी की अफवाहों पर लोग ध्यान न दें। यदि कहीं कोई संदिग्ध घटना दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, पुलिस उसकी जांच करेगी। कानून को हाथ में लेने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ भी कानूनी कदम उठाए जाएंगे। अभी तक जिले में बच्चा चोरी की कोई भी घटना सामने नहीं आई है। - उपेंद्रनाथ वर्मा, एसपी, बांका
  
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