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झारखंड से अरबों कमा रहे केंद्रीय उपक्रम लेकिन सामाजिक क्षेत्र में योगदान नगण्य; वित्त मंत्री ने उठाए सवाल

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राज्य ब्यूरो, रांची। बजट पूर्व पारस्परिक विचार-विमर्श के लिए नई दिल्ली पहुंचे वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य में सक्रिय केंद्रीय उपक्रमों को सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित करने का आग्रह केंद्र सरकार से किया।

मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा, झारखंड से अरबों की कमाई कर रहीं केंद्रीय उप्रक्रमों को सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने का निर्देश दिया जाना चाहिए। उन्होंने बिहार की तर्ज पर हर मंइयां के लिए दस हजार रुपये की केंद्रीय मदद की मांग रखी।

इसी प्रकार जीएसटी में छूट के एवज में लगभग चार हजार करोड़ रुपये का नुकसान झारखंड को उठाना पड़ेगा। इसकी भरपाई के लिए भी केंद्र सरकार से वित्त मंत्री ने आग्रह किया है।

वित्त मंत्री ने कहा, राज्य गठन के पूर्व झारखंड देश के अति पिछड़ा प्रदेश बिहार का एक हिस्सा था। फलतः सामाजिक आर्थिक पिछड़ापन के साथ ही उग्रवाद की समस्या भी हमें विरासत में प्राप्त हुई है।

राज्य और केंद्रीय पुलिस बल की गहन कार्रवाई से उग्रवाद की समस्या नियंत्रित तो हुई है, परंतु यह पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ है। राज्य गठन के उद्देश्यों को पूरा किए जाने की दिशा में सरकार द्वारा किए गए ईमानदार प्रयासों के बावजूद झारखंड को केंद्र सरकार से कई क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है।

सर्वप्रथम मंइयां सम्मान योजना में बिहार की तर्ज पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत मंइयां को कुटीर उद्योग के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता केंद्र सरकार प्रदान करे। वर्तमान में लगभग 51 लाख मंइयां को प्रतिमाह 2500 रुपये झारखंड सरकार द्वारा दिया जा रहा है।

मनरेगा योजना का नाम मनरेगा ही रखते हुए केंद्र और राज्य के बीच 60% और 40% खर्च के बंटवारे से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। या तो केंद्र सरकार 5,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की भरपाई करे या पूर्व की तरह 90% एवं 10% खर्च का बंटवारा किया जाए।

मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि झारखंड में सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल, एनटीपीसी और सेल एवं टाटा स्टील जैसे संस्थान झारखंड में 80 हजार हेक्टेपर में खनन कर अरबों रुपये की कमाई कर रहे हैं।

इसके बावजूद झारखंड के सामाजिक क्षेत्र में इन कंपनियों का कोई योगदान नहीं है। बिरसा मुंडा, डा. भीमराव अंबेडकर के नाम पर विश्वविद्यालय और गुमला जिले में जनजातीय मेडिकल कालेज के साथ-साथ होम्योपैथिक और आयुष कालेज की स्थापना करने का निर्देश केंद्र सरकार इन कंपनियों को दे।

राज्य में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी भी खोलने पर विचार किया जाए। झारखंड में अगले चार वर्षों में 1 लाख हेक्टेयर खेतों में सिंचाई क्षमता के सृजन के लिए प्रतिवर्ष केंद्र सरकार राज्य को 2000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये।
1060 किमी प्रमुख सड़कों के लिए 31,380 करोड़ की मदद करे केंद्र

  

  • वित्त मंत्री ने झारखंड की 1060 किमी प्रमुख सड़कों के लिए अनुमानित 31,380 करोड़ रुपये की मदद करे।
  • मुरीसेमर से दुमका पथ : 335 किमी : 15014 करोड़ रुपये
  • साहिबगंज से धनबाद बाइपास : 332 किमी : 9587 करोड़ रुपये
  • झुमरी तिलैया से चाईबासा : 286.40 किमी :4093 करोड़ रुपये
  • रांची से बगरा मोड़ हाइपे कारिडोर : 107.13 किमली : 2686 करोड़ रुपये


पर्यटन स्थलों के विकास के लिए भी मांगी मदद


वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार से प्रदेश के पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए नेतरहाट, तेनुघाट तथा चांडिल इकोटूरिज्म को विकसित करने हुआंगहातू गांव में स्टैच्यू ऑफ स्ट्रेप, तोपचांची (धनबाद) मलय (पलागू) में लेक प्रट परियोजना का विकारा, बतरा में रोपाई, नेवस्हाट, रांची और रामगढ़ में मतास ब्रिज का निर्माण, पतरातू में एक्रेरिथम पार्क तथा हीलियम बैलून की उड़ान, बेतता में टाइगर सफारी तथा राज्य के

मलूटी मंदिर, बैद्यनाथ मंदिर, बंशीधर मंदिर, पारसनाथ मंदिर देवड़ी मंदिर अजन धाग को टूरिस्ट कॉरिडोर बनाने के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक सहयोग की अपेक्षा।
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