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क्यों बदला केरल का नाम, जानें क्या होती है राज्य के नाम बदलने की प्रक्रिया

Chikheang 1 hour(s) ago views 724
  

यहां देखें केरलम नाम का अर्थ।  



एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। समुद्र के किनारे दक्षिण दिशा में स्थित केरल राज्य इस वक्त अपने नाम को लेकर हर तरफ सुर्खियों में बना हुआ है। दरअसल केरल की वामपंथी (LDF) सरकार ने \“केरल\“ राज्य का नाम \“केरलम\“ करने के लिए एक प्रस्ताव जारी किया था। जिस पर अब केंद्र सरकार की मुहर लग गई है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब संविधान की अनुसूची में बदलाव किया जा सकता है। ऐसे में लोगों के बीच अब \“केरल\“ और \“केरलम\“ नाम के मायनों को जानने के लिए उत्सुकता बढ़ रही है।

इसलिए इस लेख के जरिये हम आपको बताएंगे कि आखिर केरल का नाम क्यों बदला जा रहा है और \“केरलम\“ नाम का क्या अर्थ है। इसके साथ ही हम यह भी जानेंगे कि एक राज्य का नाम कैसे बदला जाता है और राज्य का नया आधिकारिक नाम देने के लिए किन संवैधानिक प्रक्रिया को अपनाया जाता है।
चर्चा में क्यों

दरअसल केरल के लोग अपनी भाषा और संस्कृति को लेकर बेहद ही संवेदनशील है। केरल के लोग मलयालम भाषा बोलते हैं और मलयालम भाषा में राज्य को \“केरलम\“ कहा जाता है, जबकि अंग्रेजी व हिंदी में इसे केरल बोला एवं लिखा जाता है। बता दें, केरल विधानसभा की ओर से 24 जून, 2024 को राज्य का नाम \“केरलम\“ करने के संबंध में एक प्रस्ताव जारी किया गया था। इस प्रस्ताव में केरल राज्य का नाम बदलकर केरलम करने के लिए कहा गया था। साथ ही प्रस्ताव में यह भी जिक्र किया गया था कि संविधान की पहली अनुसूची में राज्य का नाम केरल दर्ज है।
कैसे पड़ा केरल नाम

केरल राज्य का मलयालम भाषा में मूल नाम \“केरलम\“ ही है। लेकिन सरकारी कागजों में इस राज्य का नाम \“केरल\“ दर्ज है। दरअसल बात आजादी के बाद की है। जब भाषा के आधार पर देश में राज्यों का गठन किया जा रहा था। केरल राज्य का गठन 01 नवंबर, 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत किया गया था। लेकिन संविधान का मसौदा तैयार करने वालों ने इसका नाम केरल कर दिया। हालांकि संविधान की आठवीं अनुसूची में राज्य की भाषा मलयालम ही दर्ज है, लेकिन सरकारी कागजों में राज्य का नाम केरल दर्ज किया गया है।
नारियल से जुड़ा है अर्थ

राज्य के नाम को नारियल से जोड़ा जाता है। मलयालम भाषा में \“केरा\“ का अर्थ होता है \“नारियल का पेड़\“ और \“आलम\“ का अर्थ होता है भूमि। इस तरह जब इन दोनों ही शब्दों को जोड़ा जाता है, तब यह बनता है \“नारियल के पेड़ों की भूमि\“। इस तरह \“केरलम\“ का अर्थ हुआ नारियल के पेड़ों वाली धरती।
क्या है राज्यों के नाम बदलने की प्रक्रिया

भारत में किसी भी राज्य का नाम बदलने के लिए एक लंबी संवैधानिक प्रक्रिया होती है। हालांकि राज्य का नाम बदलना आसान नहीं है। लेकिन संविधान के अनुच्छेद तीन के तहत राज्य के पास नाम बदलने का पूरा अधिकार है। ऐसे में किसी भी राज्य का नाम बदलने के लिए चार चरण महत्वपूर्ण होते हैं, जो इस प्रकार है।

राज्य विधानसभा से शुरुआत: जिस भी राज्य का नाम बदलना है, उसके लिए उस राज्य की सरकार विधानसभा में नाम बदलने के लिए एक प्रस्ताव जारी करती है, जिसके बाद इसकी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजी जाती है।

राष्ट्रपति की इजाजत जरूरी: केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद इस फाइल को राष्ट्रपति की इजाजत के लिए भेजा जाता है।

संसद में विधेयक पास करवाना जरूरी: राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाने के बाद संसद में एक विशेष बिल पेश किया जाता है। हालांकि बिल को पास करवाने के लिए दोनों ही सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा में साधारण बहुमत से विधेयक को पास करवाना जरूरी होता है।

अंतिम चरण: संसद से बिल पास करवाने के बाद इस पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करवाए जाते हैं। अंत में राजपत्र में अधिसूचना जारी कर राज्य को आधिकारिक नाम दे दिया जाता है।

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