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UP Politics: जिला पंचायत चुनाव से पहले बाहुबली के पोस्टरों ने उड़ाई दिग्गजों की नींद, क्या बदलेंगे समीकरण?

Chikheang 16 hour(s) ago views 135
  



शिवकुमार कुशवाहा, बहजोई। इस वर्ष संभावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही जनपद में जिला पंचायत चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और संभावित प्रत्याशी बनकर लोग न केवल अपने पोस्टर बैनर और होर्डिंग लगवा रहे हैं बल्कि सामाजिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं।

खास बात यह है कि संभल के पूर्व सांसद और बाहुबली डीपी यादव के समर्थन के साथ-साथ उनके समर्थकों के द्वारा लगाए जा रहे होर्डिंग और पोस्टर बैनर से सियासी समीकरण गर्माने लगे हैं। जिला पंचायत वार्डों को केंद्र में रखकर गांवों से लेकर कस्बों तक राजनीतिक गतिविधियां खुलकर सामने आने लगी हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सत्ताधारी और विपक्षी दलों में अंदरखाने रणनीतियां बन रही हैं और संभावित दावेदारों ने अभी से जमीन पर सक्रियता बढ़ा दी है।

दरअसल, वर्तमान में जिला पंचायत चुनाव को लेकर तैयारी केवल बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इंटरनेट मीडिया, व्यक्तिगत संपर्क, वार्ड स्तर की पंचायतें और प्रचार गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। मौजूदा विधायक, पूर्व विधायक, विभिन्न दलों के जिलाध्यक्ष और संगठनात्मक पदाधिकारी वार्डवार गणित बैठाने में लगे हैं और समर्थित चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम चल रहा है।

हर बार की तरह इस बार भी लोकप्रियता के साथ जातिगत संतुलन जिला पंचायत चुनाव में निर्णायक फैक्टर के रूप में उभर रहा है। प्रत्येक वार्ड में यह आकलन किया जा रहा है कि किस वर्ग का वोट प्रभावी रहेगा और उसी आधार पर संभावित प्रत्याशियों की दिशा तय की जा रही है।

राजनीतिक पार्टी समीकरण भी बेहद अहम हो गए हैं, क्योंकि कई वार्डों में एक ही दल के भीतर एक से अधिक दावेदार सामने आ चुके हैं, जिससे अंदरूनी खींचतान की स्थिति बनती नजर आ रही है। बाजारों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर और बैनर दिखने लगे हैं।

इसी बीच सियासी हलकों में उस समय हलचल और तेज हो गई, जब बाहुबली डीपी यादव के भी पोस्टर और बैनर अलग-अलग इलाकों में नजर आने लगे। भले ही डीपी यादव की ओर से अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई हो, लेकिन उनके नाम और तस्वीरों की मौजूदगी को जिला पंचायत अध्यक्ष की दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है और माना जा रहा है कि इससे मौजूदा सियासी समीकरणों में बदलाव के संकेत मिल सकते हैं।

समाजवादी पार्टी की ओर से संगठनात्मक स्तर पर साफ निर्देश जारी किए गए हैं कि कोई भी कार्यकर्ता खुद को पार्टी प्रत्याशी घोषित नहीं करेगा और केवल संभावित प्रत्याशी शब्द का ही प्रयोग करेगा। वहीं भाजपा में भी हलचल तेज है, जहां गुन्नौर, चंदौसी, संभल और असमोली विधानसभा क्षेत्रों में दिग्गज नेता वार्ड स्तर पर संतुलन साधने में जुटे हैं और अपने-अपने समर्थकों को आगे बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।

कुल मिलाकर जिला पंचायत चुनाव अब केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों के नजरिए से भी देखा जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी गर्मी और तेज होने के आसार हैं।


पंचायत चुनाव को लेकर संगठन पूरी तरह अनुशासित तरीके से काम कर रहा है। स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी कार्यकर्ता खुद को पार्टी प्रत्याशी घोषित न करे। सभी संभावित नामों पर निर्णय संगठन और हाई कमान स्तर पर होगा। फिलहाल कार्यकर्ताओं को जनता के बीच सक्रिय रहने के निर्देश हैं। — असगर अली अंसारी, जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी, संभल।

जिला पंचायत चुनाव संगठन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अभी प्रत्याशियों को लेकर कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। पार्टी सामाजिक संतुलन, संगठन की ताकत और कार्यकर्ताओं की मेहनत के आधार पर हर वार्ड में मजबूत प्रत्याशी उतारेगी। — हरेंद्र सिंह उर्फ रिंकू चौधरी, जिलाध्यक्ष भाजपा, संभल।

बहुजन समाज पार्टी जिला पंचायत के सभी वार्डो पर अपने समर्थन के प्रत्याशी उतारेगी, जो मजबूत होगा उसको उतर जाएगा। सभी कार्यकर्ताओं को संगठित होकर मजबूत दावेदार को सामने लाने की रणनीति पर काम चल रहा है। जितेंद्र कुमार, जिलाध्यक्ष, बसपा।

पार्टी बिना किसी गठबंधन के जिला पंचायत चुनाव को लेकर मैदान में आएगी। इसको लेकर अभी शीर्ष नेतृत्व की गाइडलाइन का इंतजार है, फिलहाल कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर तैयारी करने को कहा गया है। -विजय शर्मा, जिला कोआर्डिनेटर, कांग्रेस।
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