जेआरडी टाटा ने फ्रांस की आर्मी में दी थी सर्विस
नई दिल्ली। टाटा ग्रुप (Tata Group) की गिनती भारत के सबसे प्रमुख बिजनेस ग्रुप्स में होती है। इस बिजनेस ग्रुप को आगे बढ़ाने में कई लोगों की बहुत अहम भूमिका रही है। इनमें रतन टाटा (Ratan Tata) के अलावा जेआरडी टाटा (JRD Tata) भी शामिल हैं। जेआरडी टाटा, टाटा ग्रुप के सबसे युवा चेयरमैन रहे हैं। उन्हें ये जिम्मेदारी अचानक मिली थी।
34 साल की उम्र में बने चेयरमैन
1938 में सर नौरोजी का फ्रांस में निधन हो गया था, जिससे जेआरडी टाटा ग्रुप में सबसे शक्तिशाली पद पर पहुंच गए। 34 साल की उम्र में, जेआरडी टाटा ग्रुप के इतिहास में सबसे कम उम्र के चेयरमैन थे। सर नौरोजी का अचानक देहांत होने पर उन्हें ग्रुप का चेयरमैन चुना गया।
किन सेक्टरों में ग्रुप का किया विस्तार?
जेआरडी के चेयरमैन रहते हुए टाटा ग्रुप ने स्टील, इंजीनियरिंग, पावर, केमिकल्स और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में खूब विस्तार किया। वह हाई एथिकल स्टैंडर्ड्स बनाए रखते हुए बिजनेस में सफल होने के लिए मशहूर थे।
कैसे बची जेआरडी की जान?
जेआरडी के पिता आरडी टाटा, जमशेदजी टाटा के रिश्तेदार थे। चार बच्चों में दूसरे नंबर के JRD ने फ्रांस, जापान और इंग्लैंड में पढ़ाई की, जिसके बाद उन्हें एक साल के लिए फ्रेंच सेना में भर्ती होना पड़ा। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके पास 1929 तक फ्रांस की राष्ट्रीयता थी।
JRD सेना में अपना समय बढ़ाना चाहते थे, ताकि उन्हें एक मशहूर घुड़सवारी स्कूल में जाने का मौका मिले, लेकिन उनके पिता इसके लिए तैयार नहीं थे। फ्रेंच सेना छोड़ने से JRD की जान बच गई, क्योंकि इसके कुछ ही समय बाद जिस रेजिमेंट में उन्होंने सर्विस दी थी, वे मोरक्को में एक अभियान के दौरान पूरी तरह खत्म हो गई थी।
कैसे शुरू की एयर इंडिया?
एक बार जेआरडी टाटा टूर पर थे, तब उन्हें अपने दोस्त के पिता लुई ब्लेरियोट से प्लेन उड़ाने के लिए प्रेरणा मिली, जो इंग्लिश चैनल के पार उड़ान भरने वाले पहले व्यक्ति थे। 10 फरवरी 1929 को, टाटा को भारत में जारी किया गया पहला लाइसेंस मिला।
बाद में उन्हें “Father of Indian civil aviation“ भी कहा जाने लगा। उन्होंने 1932 में भारत की पहली कमर्शियल एयरलाइन, टाटा एयरलाइंस की स्थापना की, जो 1946 में एयर इंडिया बन गई।
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