आइआइटी मद्रास। (फाइल)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सेना जल्द ही रैमजेट तकनीक से चलने वाले तोप के गोले से दुश्मनों पर और अधिक आक्रामकता से प्रहार करेगी। आइआइटी मद्रास ने सोमवार को घोषणा की कि उसने 155 मिमी के रैमजेट-प्रेरित तोप के गोले विकसित किए हैं। इसका सफल परीक्षण भी हो चुका है। इससे मौजूदा तोपखानों की रेंज या मारक क्षमता 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में यह बड़ी उपलब्धि है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मद्रास के एरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर और इस परियोजना के प्रमुख पीए रामकृष्ण ने कहा कि इस तकनीक से भारतीय तोपखाने लगभग 50 प्रतिशत अधिक दूरी पर लक्ष्यों को भेद सकेगी। वर्तमान में तोप के गोलों की रेंज आम तौर पर 30 से 40 किलोमीटर तक होती है। यह तकनीक तोप के गोले में पारंपरिक बेस-ब्लीड यूनिट को रैमजेट इंजन में बदलती है।
रैमजेट इंजन हवा से आक्सीजन लेकर गोले में लगातार थ्रष्ट पैदा करता है इससे तोप से दागे जाने से लेकर लक्ष्य तक पहुंचने के बीच लगातार गति बनी रहती है। वर्तमान में अधिक दूरी तक लक्ष्य को तबाह करने के लिए महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ता है लेकिन भविष्य में तोप के गोले ही लंबी दूरी तक तबाही मचाने में सक्षम होंगे।
यह परियोजना 2020 में भारतीय सेना के सहयोग से शुरू की गई थी। कई कठिन परीक्षणों के माध्यम से इस परियोजना पर काम हुआ है, जिसमें आइआइटी मद्रास में 76 मिमी की तोप पर प्रारंभिक परीक्षण, 155 मिमी प्रणालियों पर पैमाने के परीक्षण और सितंबर 2025 में डिओलाली के आर्टिलरी स्कूल में फील्ड ट्रायल शामिल हैं। दिसंबर 2025 में पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में परीक्षणों से इसके प्रदर्शन की पुष्टि हुई।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ) |
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