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ग्रीनलैंड। (रॉयटर्स)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को लेकर लगातार आक्रामक तेवर दिखा रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि अगर बात प्यार से नहीं बनी, तो अमेरिका ग्रीनलैंड को छीन कर अपने कब्जे में करेगा। ट्रंप के इस बयान ने न केवल यूरोप में राजनीतिक हलचल तेज कर दी है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े सैन्य गठबंधन नाटो के भविष्य पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मुद्दे पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। यूरोपीय यूनियन के रक्षा आयुक्त एंड्रियस कुबिलियस ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने सैन्य बल के जरिए ग्रीनलैंड पर कब्जा किया, तो यह नाटो के अंत जैसा होगा। खुद ग्रीनलैंड ने भी दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि उसकी सुरक्षा किसी एक देश के भरोसे नहीं, बल्कि नाटो के सामूहिक सुरक्षा ढांचे के तहत ही होनी चाहिए।
वहीं चीन ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका को दूसरे देशों को बहाना बनाकर अपने हित साधने से बचना चाहिए। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगर नाटो का सबसे ताकतवर सदस्य ही दूसरे सदस्य पर हमला करने की बात करे, तो नाटो का भविष्य क्या होगा?
सबसे पहले समझें : ग्रीनलैंड है क्या और इतना अहम क्यों?
ग्रीनलैंड एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, जो डेनमार्क के दायरे में आता है। भले ही यह कम आबादी वाला द्वीप हो, लेकिन इसकी रणनीतिक अहमियत बेहद बड़ी मानी जाती है। यह आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जहां तेजी से नई समुद्री राहें खुल रही हैं। इसके साथ ही यह इलाका खनिज संसाधनों से भरपूर माना जाता है और अमेरिका पहले से ही यहां अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए हुए है।
डोनल्ड ट्रंप का तर्क है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया, तो रूस या चीन यहां अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं। हालांकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ही साफ कर चुके हैं कि ग्रीनलैंड न तो बिकाऊ है और न ही किसी दबाव में सौंपा जाएगा।
अब असली सवाल : नाटो आखिर है क्या और कैसे काम करता है?
नाटो यानी उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन। इसकी स्थापना सन् 1949 में हुई थी। इसका मूल उद्देश्य शीत युद्ध के दौर में सोवियत संघ से सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करना था। आज नाटो में 32 देश शामिल हैं और इसकी सबसे अहम बुनियाद है अनुच्छेद 5। इस अनुच्छेद के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला, सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाता है। हालांकि यह व्यवस्था बाहरी दुश्मनों के खिलाफ सामूहिक रक्षा के लिए बनाई गई है, न कि नाटो के सदस्य देशों के आपसी टकराव के लिए।
तो क्या यूएस-डेनमार्क टकराव में अनुच्छेद 5 लागू होगा?
इसका जवाब साफ है, नहीं। अगर अमेरिका और डेनमार्क आमने-सामने आते हैं, तो अनुच्छेद 5 लागू नहीं हो सकता, क्योंकि इसके लिए सभी सदस्यों की सर्वसम्मति जरूरी होती है और अमेरिका खुद इसका हिस्सा होगा। यही नाटो की सबसे बड़ी कमजोरी मानी जाती है कि वह अपने ही सदस्यों के बीच टकराव से निपटने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं बताता।
डेनमार्क के पास क्या विकल्प हैं?
डेनमार्क के पास नाटो के अनुच्छेद 4 के तहत अगर उसे अपनी संप्रभुता या क्षेत्रीय अखंडता पर खतरा महसूस होता है तो आपात परामर्श बुलाने का विकल्प है। हालांकि इस अनुच्छेद के तहत कोई सैन्य कार्रवाई अपने आप तय नहीं होती, बल्कि इसका मकसद सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाना होता है।
अगर अमेरिका ने सच में बल प्रयोग किया तो क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में नाटो अंदर से बंट सकता है। हालात 2003 के इराक युद्ध जैसे हो सकते हैं, जब कुछ देश अमेरिका के साथ खड़े थे और कुछ उसके खिलाफ। फर्क बस इतना होगा कि इस बार अमेरिका किसी बाहरी देश पर नहीं, बल्कि खुद नाटो के एक सदस्य पर निशाना साधेगा। यही वजह है कि इसे नाटो के अस्तित्व के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है।
नाटो में अमेरिका की भूमिका क्यों निर्णायक मानी जाती है?
अमेरिका नाटो का सबसे ताकतवर सदस्य है। वह सबसे ज्यादा रक्षा खर्च करता है, सबसे ज्यादा सैनिक और हथियार उसी के पास हैं और नाटो की सैन्य कमान भी परंपरागत रूप से एक अमेरिकी जनरल के हाथ में रहती है। अगर अमेरिका पीछे हटता है या अलग राह चुनता है, तो नाटो बेहद कमजोर हो जाएगा और यूरोप को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी पड़ेगी।
तो आखिर नाटो बचेगा या टूटेगा?
ग्रीनलैंड का मामला सिर्फ जमीन के एक टुकड़े का नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून, राष्ट्रीय संप्रभुता और नाटो की आत्मा से जुड़ा सवाल बन चुका है। अगर अमेरिका दबाव या बल के रास्ते पर आगे बढ़ता है, तो नाटो एक संगठन के तौर पर तो मौजूद रह सकता है, लेकिन उस पर टिका आपसी भरोसा टूट सकता है।
यही वजह है कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क, यूरोप और यहां तक कि चीन भी इस विवाद को सिर्फ एक द्वीप का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था की बड़ी परीक्षा के तौर पर देख रहे हैं।
(समाचार एजेंसी एपी के इनपुट के साथ) |
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