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गाजियाबाद में संचार नेस्ट सहकारी आवास समिति ने किया 100 करोड़ से ज्यादा का घोटाला, फ्लैटों की बिक्री और बैंक खातों पर रोक

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वेव सिटी स्थित संचार नेस्ट आवास समिति की पाम हाइट्स सोसायटी। जागरण






जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। वेव सिटी में उच्च स्तरीय जांच में संचार नेस्ट सहकारी आवास समिति (आविप) द्वारा वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम देने का पर्दाफाश हुआ है। आविप के अधिकारियों का अनुमान है कि इसमें 100 करोड़ रुपये से भी अधिक का घोटाला हुआ है। हालांकि घोटाला कितने का हुआ है इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई।

विभाग ने समिति के फ्लैटों के क्रय-विक्रय के साथ-साथ सभी बैंक खातों के संचालन पर रोक लगा दी है। जांच में 50 से अधिक बेनामी संपत्तियां मिली हैं। समिति का आफिस को सील कर दिया है। आगे की जांच के लिए समिति के बही-खाते और अभिलेखों को पुलिस बल के साथ जब्त करने का आदेश दिया गया है।  
अवैध रूप से बना दिए 506 फ्लैट

आविप के अधिकारियों के मुताबिक समिति के पदाधिकारियों ने अवैध रूप से 506 फ्लैट बना दिए। वर्ष 2009 से फ्लैट बनाए जा रहे हैं। समिति के संचालन मंडल में नौ लोग होने चाहिए लेकिन मंडल में सात लोग ही कार्यरत हैं। मंडल में कई लोग केरल के हैं। वर्ष 2012 में सदस्यों को फ्लैट दिए जाने थे।

समिति के सदस्यों ने लंबे समय से फ्लैटों की रजिस्ट्री न किए जाने, अनाधिकृत रूप से वृद्धि शुल्क लगाए जाने और समिति पदाधिकारियों द्वारा परेशान किए जाने की शिकायतें दर्ज कराई थीं। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा 23 दिसंबर 2025 ने उप आवास आयुक्त/उप निबंधक, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, लखनऊ से मामले की जांच कराई। जांच अधिकारी द्वारा 30 दिसंबर 2025 को जांच रिपोर्ट पेश की।

रिपोर्ट के मुताबिक समिति पदाधिकारियों द्वारा वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। समिति के फ्लैटों को अवैध रूप से ओपन मार्केट में बेचा गया। समिति सदस्यों के फ्लैटों की रजिस्ट्री से संबंधित स्टांप ड्यूटी की धनराशि का उपयोग फ्लैट निर्माण में कर दिया गया। जांच के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने सहयोग नहीं किया। समिति सचिव ने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए।

सहकारी अधिकारी (आवास), गाजियाबाद ने भी 12 नवंबर 2025 को पत्र भेजकर अवगत कराया था कि उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1965 की धारा-66 के तहत चल रहे निरीक्षण में समिति सचिव द्वारा जानबूझकर अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। अपर आवास आयुक्त/अपर निबंधक, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, लखनऊ दीपक सिंह ने उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1965 की धारा-37 के अंतर्गत समिति के अभिलेखों के अभिग्रहण का आदेश जारी किया है।

आदेश के तहत सतीश कुमार, सहकारी अधिकारी (आवास), गाजियाबाद को अधिग्रहणकर्ता अधिकारी नामित किया गया है। उन्हें 15 दिन के भीतर समिति के सभी अभिलेखों और बहियों का अधिग्रहण सुनिश्चित करना होगा। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस बल का उपयोग भी किया जा सकेगा। आवास विकास परिषद के हाउसिंग ऑफिसर सतीश द्विवेदी व अन्य अधिकारियों ने सोमवार को समिति का ऑफिस सील कर दिया।
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