मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा खाने की परंपरा।
जागरण संवाददाता, धनबाद। Dahi Chura good for health: स्नान-दान का पर्व यानी मकर संक्रांति (Makar Sankranti-2026) इस साल 14 जनवरी को मनाया जाएगा। पर्व को लेकर शहर के हर छोर पर तिलकुट, लाई, चूड़ा और तिल की दुकानें सजी हुई हैं। कारोबारियों के अनुसार इस मकर संक्रांति में शहर में में 8.5 लाख लीटर दूध, 60 टन दही के साथ 800 टक चूड़ा तथा 300 टन गुड़ की खपत भी होगी भारी बिक्री होगी।
धनबाद के थोक व्यापारी व जिला खाद्यान व्यवसायी संघ के अध्यक्ष बिनोद गुप्ता ने बताया है कि मकर संक्रांति में शहर में 800 टक चूड़ा तथा 300 टन गुड़ की खपत है। पर्व को लेकर बाजार समिति में ट्रकों से चुड़ा व गुड़ की खेप भी उतर चुकी है। बताया 800 टन में कई प्रकार के चुड़ा व 300 टन में कई प्रकार के गुण शामिल हैं।
पूराना बाजार के खुदरा दूध दुकान के संचालक विजय साव बताते हैं 12, 13 तथा 14 जनवरी को दूध की खपत पांच गुनी हो गई है। इसके लिए संबंधित कंपनी को आर्डर दिया गया है। उन्होंने बताया कि वे सुधा दूध रखते हैं मगर दूध की खपत को देखते हुए अमूल और मेधा दूध भी मंगा रहे हैं।
इधर पर्व को लेकर स्थानीय ग्वालों के यहां भी दूध की डिमांड में भारी बढ़ोतरी हुई है। मनईटांड़ के खटाल के जयदेव महतो ने बताया कि शहर में 65 बड़े घटालों के साथ लगभग 40 छोटे खटाल है। इन तमाम 105 छोटे बड़े खटालों से 2.5 लाख लीटर दूध की आपूर्ति होगी
।उन्होंने बताया कि होली, छठ तथा मकर संक्राति जैसे पर्व पर लोकल ग्वाल से अपनी क्षमता के अनुसार एक सीमित मात्रा में हीं दूध की आपूर्ति कर सकते है। ज्यादातर दूध की खपत को तो डेयरी कंपनियां पूरा करती है।
वही मेधा डेयरी के झारखंड हेड अमृतेश कुमार ने बताया कि राज्य मकर संक्रांति को लेकर दूध और दही की भारी डिमांड है आने वाले तीन दिनों यानी 12, 13 और 14 जनवरी को राज्य भर में 15 लाख लीटर दूध तथा 2.5 टन दही खपत है इसमें अकेले धनबाद में 2.8 लाख लीटर दूध तथा 40 एमटी दही की खपत होगी।
वही अमूल डेयरी के मार्केटिंग स्टेट हेड प्रणव कुमार ने बताया कि 12, 13 वर्ष 14 जनवरी को राज्य भर में 10 लाख लीटर दूध तथा 300 तन दही की खपत होगी। इस खपत में अकेले सिर्फ धनबाद जिले में 2 लाख लीटर दूध तथा आठ एमटी दही का आर्डर है।
सुधा डेयरी के जिला हेड आरके रमन बताते हैं कि राज्य भर में मकर संक्रांति को लेकर दूध और दही की खपत काफी बढ़ गई है इस मकर संक्रांति पर अकेले धनबाद में 2.80 लाख लीटर दूध तथा 40 एमटी दही के खपत है जिसे पूरा करने के लिए कंपनियां लगी हुई है।
दही-चूड़ा खाने के फायदे
भारत के अधिकतर त्योहार ज्योतिष और स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं। मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा खाने की परंपरा भी इसी का उदाहरण है। सर्दियों के मौसम में यह भोजन शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। चूड़ा, जिसे चिवड़ा या पोहा भी कहते हैं, चावल से बनता है और इसमें कॉम्प्लेक्स फाइबर होता है।
यह पानी सोखकर धीरे-धीरे पचता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। वहीं दही एक प्राकृतिक प्रोबायोटिक है, जो आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है और पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है। दही-चूड़ा ऊर्जा देने वाला, हल्का और पौष्टिक भोजन है, जो सर्दियों में शरीर को स्वस्थ और सक्रिय रखने में मदद करता है। |
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