राज्य ब्यूरो, लखनऊ। केंद्र सहायतित योजनाओं में धनराशि समय से नहीं मिल पाने की दिक्कतों से राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को अवगत कराया है। कहा है कि नई व्यवस्था एसएए-स्पर्श (सिंगल नोडल एजेंसी-सिस्टम आफ इंटीग्रेटेड क्विक ट्रांसफर) को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए। लाभार्थियों से जुड़ीं डीबीटी योजनाएं अभी इससे बाहर ही रखी जाएं ताकि धनराशि मिलने में विलंब से लाभार्थी इससे प्रभावित न हों।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने केंद्रीय बजट पर चर्चा के लिए शनिवार को दिल्ली में आयोजित बैठक में एसएनए-स्पर्श के कारण फंड ट्रांसफर में आ रही दिक्कतों से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि एसएनए-स्पर्श की योजनाओं को व्यावहारिक व सुगम बनाया जाना चाहिए, जिससे केंद्र सहायतित योजनाओं में समय से धनराशि मिल सके।
इस प्रणाली में केंद्रांश राज्यों के समेकित निधि में नहीं आने से व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। इस प्रणाली के पूरी तरह डिजिटल होने के बाद भी सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली/एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस-आइएफएमएस) में निरंतर बदलाव, फाइल अपलोड की सीमाएं और केंद्रीय मंत्रालयों के अनुमोदन में लगने वाला समय भुगतान में विलंब का कारण बन रहा है।
यूपी को इस प्रणाली के तीसरे चरण में लिया गया है, लेकिन सभी चरणों के लिए समय सीमा समान रखी गई है। यह बड़े राज्यों के लिए व्यावहारिक नहीं है। मांग की कि एसएनए-स्पर्श में योजनाओं की समय सीमा में विस्तार किया जाए।
बता दें कि केंद्र सहायतित योजनाओं की संख्या बदलती रहती है। वर्तमान में प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, समग्र शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और मनरेगा जैसी लगभग 70 योजनाएं राज्य में संचालित हैं।
चिकित्सा शिक्षा, सिंचाई व जल संसाधन, राजस्व अभाव एवं दैवीय आपदा, आवास एवं शहरी नियोजन, ऊर्जा, महिला कल्याण, समाज कल्याण व जनजाति कल्याण, बेसिक शिक्षा, नगर विकास, कृषि, नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन, पंचायती राज, बाल विकास एवं पुष्टाहार, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, ग्राम्य विकास, लोक निर्माण, खाद्य एवं रसद, गृह-पुलिस, अवस्थापना, औद्योगिक विकास के साथ ही अन्य विभागों की योजनाओं के लिए केंद्रीय सहायता मिलती है। नवंबर तक तीन विभागों को उनकी योजनाओं में कोई धनराशि नहीं मिली थी।
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को महज 18.7 प्रतिशत, ऊर्जा विभाग को 23.2, महिला कल्याण विभाग को 25.3, समाज कल्याण व जनजाति कल्याण को 26, बेसिक शिक्षा विभाग को 30.2, नगर विकास को 30.8 और कृषि विभागों को 31.4 प्रतिशत धनराशि ही केंद्रांश के तहत मिली थी।
अब केंद्र से सीधे लाभार्थी के खाते में धनराशि भेजने की व्यवस्था
प्रदेश में अब तक केंद्र सहायतित योजनाओं के मद में केंद्रांश सीधे संंबंधित विभाग के पास भेज दिया जाता रहा है। विभाग के स्तर से धनराशि का भुगतान संंबधित एजेंसी को किया जाता रहा है। इस व्यवस्था में केंद्रीय सहायता की धनराशि कई दिनों तक विभाग के पास ही फंसी रहती थी।
एसएनए-स्पर्श के तहत केंद्र ने अब यह व्यवस्था है कि बजट की उपयोगिता प्रमाण पत्र बिल बाउचर के साथ मिलने पर धनराशि सीधे संबंधित व्यक्ति या एजेंसी को ट्रांसफर की जाती है।
इस व्यवस्था से धनराशि विभागों के पास लंबित नहीं रहेगी। सही लाभार्थी को सीधे धनराशि मिलेगी। यानी जितना खर्च करेंगे उतनी ही धनराशि पाएंगे।
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