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फर्जी फर्म से 2.20 करोड़ की जीएसटी चोरी, फिरोजाबाद में कंपनी मालिक समेत तीन गिरफ्तार

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आरोपित।



जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। सोलर पैनल का काम करने वाली दिव्य गति लिमिटेड के मालिक और उसके दो कर्मचारियों को पुलिस ने फर्जी फर्म बनाकर 2.20 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार फर्म का टर्न ओवर बढ़ाकर उसे शेयर मार्केट में पंजीकृत कराने के लिए फर्म के कर्मचारियों को ही फर्जी फर्म का निदेशक बना दिया गया।

इनके विरुद्ध जीएसटी के सहायक आयुक्त ने पिछले वर्ष अक्टूबर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इन्हें रविवार को थाना उत्तर में पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।
दिव्य गति लिमिटेड का टर्नओवर बढ़ाकर शेयर मार्केट में फर्म पंजीकृत कराने का था प्रयास

एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद ने बताया कि 15 अक्टूबर 2025 शृष्टि जैन सहायक आयुक्त राज्य कर खंड दो फिरोजाबाद ने थाना उत्तर में जीएसटी चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें दिव्य हाईब्रिड प्राइवेट लिमिटेड के दो निदेशकों पवन कुमार निवासी भारत टाकीज के पीछे शांति नगर आसफाबाद, रोहित कुशवाहा निवासी नयापुरा तारागंज लश्कर, ग्वालियर को नामजद किया। उन्होंने इन पर कूटरचित प्रपत्रों के आधार पर फर्म का जीएसटी पंजीयन प्राप्त कर 2.20 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी करने का आरोप लगाया था। इस मामले की जांच को विशेष जांच टीम (एसआइटी) गठित की गई थी।
सहायक आयुक्त खंड दो ने पिछले वर्ष अक्टूबर में थाना उत्तर में दर्ज कराई थी प्राथमिकी

जांच के दौरान पता चला कि दिव्य गति लिमिटेड के मालिक पवन वर्मा निवासी विभव नगर थाना उत्तर ने फर्म को अवैध लाभ पहुंचाने के लिए अपने कार चालक पवन कुमार और ग्वालियर स्थित फर्म के कर्मचारी रोहित और आगरा के लोहामंडी निवासी चार्टेड एकाउंटेंट कमल कुमार के साथ मिलकर ने दिव्य हाईब्रिड नाम से फर्जी फर्म बनाई। पवन कुमार एवं रोहित कुमार को इसका निदेशक दर्शाते हुए एक मार्च 2024 को रिद्धि सिद्धि मार्केट दुकान नंबर 11, दम्मामल नगर फिरोजाबाद के पते पर जीएसटी पंजीकरण कराया।
फर्जी फर्म से खरीदा माल

इसके बाद फर्जी फर्म द्वारा वर्ष 2023-2024 में बिना किसी माल की खरीद के 8.32 करोड और वर्ष 2024-2025 में 7.58 लाख रुपये की बिक्री दिखाई। इन दो वर्षों में जीएसटी की ओर से कुल 2.20 करोड रुपये की देनदारी तय की गई। परंतु फर्म ने इसका भुगतान नहीं किया।
एसपी ने दी जानकारी

एसपी ने बताया कि फर्म ने क्रय-विक्रय में दर्शाए गये माल एवं उनके परिवहन में उपयोग लाए गए वाहन भी फर्जी पाए गए। इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ प्राप्त करने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग किया। इसके बाद पवन वर्मा, पवन कुमार और रोहित को गिरफ्तार कर लिया गया। इनके कब्जे से पांच मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद हुए हैं। इस मामले में चार्टेड एकाउंटेंट कमल कुमार ने अपने कंप्यूटर से फर्जी फर्म के पंजीकरण से लेकर उसके बिल बाऊचर बनाने की कार्रवाई है। उसकी तलाश की जा रही है।
पवन वर्मा है सरगना

इंस्पेक्टर राकेश कुमार ने बताया कि पूरे खेल का मास्टरमाइंड पवन वर्मा है। उसने अपनी फर्म का टर्न ओवर दो सौ करोड़ से अधिक करने के लिए अपने कार चालक और कर्मचारी को निदेशक बनाकर फर्जी फर्म बनाई। वह अपनी फर्म का टर्नओवर बढ़ाकर शेयर मार्केट में अपनी फर्म पंजीकृत कराना चाहता था।
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