अदालत ने स्पष्ट कहा कि बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध समाज की जड़ों को हिला देते हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड ही न्याय है।
जागरण संवाददाता, पंचकूला। नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध में पंचकूला की फास्ट ट्रैक पाॅक्सो अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी को 20 वर्ष की सजा तथा 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।अदालत ने स्पष्ट कहा कि बच्चों के विरुद्ध यौन अपराध समाज की जड़ों को हिला देते हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड ही न्याय है।
यह मामला 6 अप्रैल 2021 को महिला थाना पंचकूला में दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता बच्ची की मां ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह हेल्पर का काम करती है। वह और उसका पति दोनों मजदूरी करते हैं और घर में तीन बच्चे हैं।
शिकायत के अनुसार 5 अप्रैल 2021 को जब बच्ची की मां काम से रात करीब 8:30 बजे घर लौटीं तो उनके बच्चे डरे-सहमे हुए थे। उनके छोटे बेटे ने बताया कि दो दिन पहले जब मां काम पर गई हुई थी, तब आरोपित पड़ोसी घर में घुस आया और उनकी 7 वर्षीय बहन के साथ अश्लील व आपराधिक हरकतें कीं।
बच्ची ने अपनी मां को बताया कि आरोपित ने उसके साथ जबरदस्ती की, उसके साथ मारपीट की, मुंह में कपड़ा डालकर चुप कराने की कोशिश की और जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद बच्ची बुरी तरह डर गई और मानसिक रूप से टूट गई थी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए बच्ची की मां ने 6 अप्रैल 2021 सुबह करीब 6:30 बजे पुलिस कंट्रोल रूम में फोन किया। पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़ित परिवार को महिला थाना पंचकूला लाया गया। महिला थाना पंचकूला में इस संबंध में मामला दर्ज किया गया।
ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती : अदालत
जांच के दौरान पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य भौतिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष पेश किया गया। पाक्सो कोर्ट ने सभी तथ्यों, परिस्थितियों और साक्ष्यों पर गहन विचार करने के बाद आरोपित को दोषी पाया।
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि नाबालिग बच्चों के साथ यौन अपराध अत्यंत गंभीर श्रेणी में आते हैं। ऐसे अपराध न केवल पीड़ित को बल्कि पूरे समाज को गहरी चोट पहुंचाते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। |
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