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30:1 से अधिक न हो सकता छात्र-शिक्षक अनुपात, CBSE स्कूलों के लिए शिक्षकों का ब्योरा अपलोड करना अनिवार्य

deltin33 1 hour(s) ago views 743
  

हर वर्ष 15 सितंबर से पहले तक अनिवार्य तौर पर अपलोड करनी होगी जानकारी।



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने संबद्धित स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर शिक्षकों से जुड़ी अनिवार्य जानकारी समय पर अपलोड और नियमित रूप से अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।

बोर्ड ने इस संबंध में 12 जनवरी 2026 को एक दिशानिर्देश जारी कर सभी स्कूल प्रधानाचार्यों को मैंडेटरी पब्लिक डिस्क्लोजर (अनिवार्य सार्वजनिक प्रकटीकरण) के नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है।

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर शिक्षकों के नाम, शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण, अनुभव से संबंधित विवरण के साथ-साथ प्रमाणित दस्तावेज अपलोड करने होंगे। यह जानकारी बोर्ड को निर्धारित प्रारूप के अनुसार उपलब्ध करानी होगी, ताकि स्कूलों के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

बोर्ड ने कहा कि संबद्धता उपनियमों के तहत स्कूलों के लिए अपनी वेबसाइट विकसित करना और उसे अद्यतन रखना अनिवार्य है। वेबसाइट पर स्कूल की संबद्धता स्थिति, आधारभूत संरचना, शिक्षकों का विवरण, विद्यार्थियों की संख्या, संपर्क विवरण, शुल्क संरचना और ट्रांसफर सर्टिफिकेट जैसी जानकारियां भी उपलब्ध होनी चाहिए।

सीबीएसई ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी स्कूल को प्रत्येक वर्ष अपनी वार्षिक रिपोर्ट तैयार कर 15 सितंबर से पहले वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। इस रिपोर्ट में शैक्षणिक कैलेंडर, शैक्षणिक उपलब्धियां, नवाचार, पर्यावरण शिक्षा से जुड़े प्रयास, पीटीए गतिविधियां और स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के महत्वपूर्ण निर्णयों का विवरण शामिल होना चाहिए।

बोर्ड ने स्कूलों को शिक्षक-छात्र अनुपात को लेकर भी कहा कि स्कूल में शिक्षकों का अनुपात 30:1 से अधिक नहीं होना चाहिए और प्रत्येक सेक्शन में कम से कम 1.5 शिक्षक अनिवार्य होंगे, जिसमें प्रधानाचार्य, शारीरिक शिक्षा शिक्षक और काउंसलर को शामिल नहीं किया जाएगा।

सीबीएसई ने यह भी कहा है कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद कई स्कूल अपनी वेबसाइट पर या तो जानकारी अपडेट नहीं कर रहे हैं या गलत व अपूर्ण विवरण अपलोड कर रहे हैं। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि इन निर्देशों का पालन न करने पर संबद्धता उपनियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है और दंड भी लगाया जा सकता है।

बोर्ड के अनुसार, यह जानकारी अभिभावकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि वे स्कूलों में उपलब्ध शिक्षण सुविधाओं और शैक्षणिक ढांचे से अवगत हो सकें।

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