गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने क्विक कॉमर्स कंपनियों से “10 मिनट डिलीवरी” की अनिवार्य समय-सीमा हटाने को कहा है। सरकारी सूत्रों ने न्यूज 18 को बताया कि कई दौर की बातचीत के बाद केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने बड़ी डिलीवरी कंपनियों को इस सख्त डेडलाइन को हटाने के लिए राजी कर लिया है।
केंद्र सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला
डिलीवरी समय को लेकर ड्राइवरों पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए Blinkit, Zepto, Zomato और Swiggy जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स के साथ बैठक की गई थी। सरकार के निर्देश के बाद Blinkit ने अपनी ब्रांडिंग से 10 मिनट में डिलीवरी का वादा हटा दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बाकी कंपनियां भी ऐसा ही कदम उठाएंगी, ताकि डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा और काम की स्थिति बेहतर हो सके।
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इस फैसले का हो रहा था विरोध
इस फैसले का मकसद गिग वर्कर्स को ज़्यादा सुरक्षित माहौल देना, उनके काम की स्थिति बेहतर बनाना और उनकी जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। गिग वर्कर्स की सुरक्षा का मुद्दा संसद के शीतकालीन सत्र में भी उठा था। इस दौरान राघव चड्ढा, जो आम आदमी पार्टी (AAP) से राज्यसभा सांसद हैं, ने कहा था कि 10 मिनट की डिलीवरी की शर्त वर्कर्स को सड़क पर अनावश्यक जोखिम लेने के लिए मजबूर करती है। उन्होंने बताया कि ऐसे अव्यावहारिक लक्ष्य पूरे करने के दबाव में डिलीवरी कर्मचारी अपनी जान खतरे में डालते हैं। चड्ढा ने संसद से अपील की थी कि सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी की मानवीय कीमत पर भी सोचने की जरूरत है।
सोमवार को राघव चड्ढा ने एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें वह Blinkit के डिलीवरी एजेंट की वर्दी पहनकर खुद ऑर्डर डिलीवर करते नजर आए। इस वीडियो के जरिए उन्होंने गिग वर्कर्स की रोज़मर्रा की मेहनत और मुश्किलों को सामने लाने की कोशिश की और क्विक कॉमर्स सेक्टर में बेहतर कामकाजी हालात की मांग दोहराई। उन्होंने यह वीडियो X पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“बोर्डरूम से दूर, ज़मीनी हकीकत में। मैंने उनका एक दिन जिया।” |
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