search

JUT ने इंजीनियरिंग के छात्रों के भविष्य के साथ किया खिलबाड़, हाइकोर्ट का आदेश - मामले की जांच सीबीआइ करेगी

Chikheang 2026-1-13 16:56:36 views 1248
  

हाई कोर्ट ने इंजीनियरिंग के छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोके जाने की सीबीआइ जांच के आदेश दिए हैं।



राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने धनबाद इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी के इंजीनियरिंग के छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोके जाने की CBI जांच के आदेश दिए हैं।

अदालत ने प्रथम द्रष्टया इसे छात्रों को फंसाने और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ का मामला बताते हुए सीबीआइ को झारखंड यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी(जेयूटी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICT) की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने सीबीआइ को इस बात की जांच करने को कहा है कि एआइसीटीई और जेयूटी ने छात्रों को किस प्रकार फंसाया है एवं पूरे मामले में किस अधिकारी या संस्था ने क्या भूमिका निभाई है।

सीबीआइ को दो सप्ताह में अपनी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने दोनो संस्थानों को जांच में सहयोग करने का भी निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई तीन फरवरी को होगी।
धनबाद इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी ने हाई कोर्ट में दायर की थी याचिका

मामले में धनबाद इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने संस्थान को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए 30 अप्रैल 2025 को विधिवत स्वीकृति प्रदान की थी। एआइसीटीई की इस स्वीकृति के आधार पर संस्थान ने छात्रों का नामांकन किया।  

छात्रों ने भविष्य को सुरक्षित मानते हुए दाखिला लिया गया। झारखंड यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी ने इन छात्रों को परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया। इससे न केवल छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई, बल्कि उनका पूरा शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया। इसके खिलाफ संस्थान ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की और छात्रों का भविष्य बचाने का आग्रह किया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने जेयूटी के रवैये पर कड़ी टिप्पणी भी की। कोर्ट ने कहा कि जैसे ट्रैफिक पुलिस कभी-कभी नो एंट्री या पार्किंग बोर्ड हटाकर आम लोगों को फंसाकर चालान या अवैध वसूली करती है, वैसा ही दृष्टिकोण इस मामले में झारखंड यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी द्वारा अपनाया गया प्रतीत होता है।
एआइसीटीई की मंजूरी के बाद भी परीक्षा से वंचित करना बेहद गंभीर

अदालत ने कहा कि एआइसीटीई की मंजूरी के बाद भी छात्रों को परीक्षा से वंचित करना बेहद गंभीर विषय है। यह न केवल छात्रों के साथ अन्याय है, बल्कि उनके भविष्य को नष्ट करने जैसा कदम है।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह मामला राज्य प्राधिकारियों द्वारा अपनाई गई भ्रष्ट प्रथाओं की ओर इशारा करता है।

कोर्ट ने माना कि इस पूरे घटनाक्रम में छात्रों को जानबूझकर ऐसी स्थिति में डाला गया, जहां वे न पढ़ाई पूरी कर पा रहे हैं और न ही परीक्षा दे पा रहे हैं।
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
168484