राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों की तरफ से वर्ष 2026-27 के लिए दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) में विद्युत नियामक आयोग ने कई कमियां निकालते हुए पावर कारपोरेशन से जवाब तलब किया है।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च बिजली दर में डालने के मुद्दे पर भी जानकारी मांगी है। सभी बिजली कंपनियों की तरफ से वर्ष 2026-27 के लिए दाखिल एआरआर तथा वर्ष 2024-25 के लिए दाखिल ट्रूअप पर आयोग ने सुनवाई शुरू कर दी है। बिजली दरें बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी सुनवाई होगी।
विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष कुमार वर्मा ने कहा है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर अपेक्स माडल में उसका खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता है, क्योंकि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा पहले ही इस पर आदेश जारी किया जा चुका है।
पावर कारपोरेशन ऊर्जा मंत्रालय की एक एडवाइजरी को लेकर बिजली कंपनियां आरडीएसएस योजना में स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर होने वाले खर्च की वसूली उपभोक्ताओं से करना चाहती हैं।
बिजली कंपनियों ने लगभग 3837 करोड़ रुपये स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए मांगा है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर की लागत उपभोक्ताओं पर डालने पर बिजली सात प्रतिशत तक महंगी हो जाएगी।
इसके विरोध में उपभोक्ता परिषद पहले ही आयोग में अपना प्रस्ताव दाखिल कर चुका है। स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग पर आयोग ने अरडीएसएस योजना के तहत लगाए गए प्रति मीटर मासिक लागत, कुल परिचालन व्यय तथा केंद्र और राज्य सरकार से प्राप्त अनुदानों की जानकारी मांगी है। पिछले तीन वर्षों में लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की संख्या भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग से जुड़े खर्च को अलग कर वास्तविक प्रशासनिक खर्च का पुनर्मूल्यांकन करने के निर्देश दिए हैं। जिससे उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ न पड़े।
आयोग ने बिजली खरीद लागत, पारेषण शुल्क, राजस्व आंकलन तथा हानियों के अनुमानों का ठोस आधार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसे साथ ही पूंजीगत व्यय, बड़ी परियोजनाओं की निवेश योजना और लंबित न्यायिक मामलों के वित्तीय प्रभाव का भी पूरा विवरण मांगा है। |
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