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नोएडा में घर खरीदारों का इंतजार बरकरार, लिगेसी पॉलिसी का लाभ लेकर भी बिल्डर पीछे खींच रहे कदम

Chikheang 3 hour(s) ago views 817
  

सांकेतिक तस्वीर।  



जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। अधर में फंसी बिल्डर परियोजनाओं को पूरा कराकर उसमें घर खरीदारों को कब्जा दिलाने, रजिस्ट्री की अड़चन दूर करने के लिए लागू की गई लिगेसी प्रोजेक्ट पॉलिसी यीडा के लिए अधिकार प्रभावी साबित नहीं हुई है। दो बिल्डर परियोजनाओं को छोड़कर अन्य पांच परियोजनाएं किसी न किसी कारण से अटक गई हैं। पालिसी लागू होने के बाद जुलाई 2025 तक केवल 461 घर खरीदारों को ही मालिकाना हक मिल पाया है।
यीडा में 11 बिल्डर परियोजना में से सात ने लिया था पॉलिसी का लाभ

घर खरीदारों के हितों को सुरक्षित करने के लिए प्रदेश सरकार ने अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों को लागू करते हुए लिगेसी प्राेजेक्ट पॉलिसी लागू की थी। यीडा में 11 बिल्डर परियोजना में से सात ने इस पॉलिसी के तहत लाभ लिया था।

प्राधिकरण को बिल्डर पर बकाया रकम से 25 प्रतशित के तौर पर 402.50 करोड़ रुपये मिले और एक वर्ष में 671.59 करेाड़ रुपये मिलने का आकलन था। लेकिन जिन घर खरीदारों को राहत देने के लिए पॉलिसी लागू की गई, उसमें से 6828 के सापेक्ष महज 401 घर खरीदारों को ही मालिकाना हक मिल पाया, लेकिन सात में से केवल तीन बिल्डर परियोजनाएं ही आगे बढ़ रही हैं।

एटीएस बिल्डर से प्राधिकरण को मार्च तक 86.6 करोड़ रुपये की अगली किस्त मिलनी है। लाजिक्स बिल्डर से भी इसी माह 55 करोड़ रुपये मिलेंगे। अजय स्टार सिटी परियोजना से प्राधिकरण को पूरा भुगतान मिल चुका है, लेकिन शेष बिल्डर परियोजनाओं को लेकर पेंच फंसा है।

सुपरटेक बिल्डर का प्रकरण एनसीएलटी, और ग्रीन वे व सन वर्ल्ड बिल्डर का प्रकरण हाईकोर्ट में पहुंच चुका है। इसके अलावा ओमनिस बिल्डर का प्रकरण भी शासन में लंबित है। तीनों परियोजनाओं से प्राधिकरण को अच्छी खासी बकाया रकम के अलावा परियोजना में कई खरीदारों को राहत मिलेगी।
इन परियोजना में 6855 फ्लैट बायर्स फंसे

यीडा सीईओ आरके सिंह का कहना है कि शासन स्तर व हाई कोर्ट में लंबित प्रकरणों में मजबूत पैरवी की जा रही है। शासन से लंबित प्रकरण का जल्द निस्तारण का अनुरोध किया गया है। यीडा के अलावा नोएडा में भी 57 बिल्डर परियोजनाओं में चार बिल्डरों ने पॉलिसी के तहत सहमति देने के बाद आगे कदम नहीं बढ़ाए हैं। जबकि 11 बिल्डरों ने पॉलिसी के तहत आवेदन के साथ 25 प्रतिशत राशि के भुगतान की शर्त को भी पूरा नहीं किया और आंशिक भुगतान किया।

इसके अतिरिक्त 36 बिल्डरों ने 25 प्रतिशत भुगतान के बाद प्राधिकरण को अगली किस्त का भुगतान तक नहीं किया। इन परियोजना में 6855 फ्लैट बायर्स फंसे हैं। प्राधिकरण दिसंबर 2025 तक 4134 फ्लैट खरीदारों को मालिकाना हक दिलाने में कामयाब हो पाया है।
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