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देहरादून नगर निगम टेंडर में गड़बड़ी से अधिकारियों पर गिरी गाज, नौ विकास कार्य निरस्त

Chikheang 3 hour(s) ago views 689
  



जागरण संवाददाता, देहरादून। देहरादून नगर निगम में विकास कार्यों की निविदाओं को लेकर उठे सवालों के बाद आखिरकार जांच पूरी हो गई है। जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रिपोर्ट के आधार पर नौ विकास कार्यों को निरस्त करने की संस्तुति की गई है, जबकि लापरवाही, पुनरावृत्ति और गंभीर त्रुटियों के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई अमल में लाई गई है। इससे पहले प्रारंभिक जांच में ही सात कार्यों में गड़बड़ी पकड़ में आ गई थी, जिसके बाद नगर निगम प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया।

नगर निगम के अभियंत्रण अनुभाग की ओर से विभिन्न वार्डों में निर्माण एवं विकास कार्यों के लिए आमंत्रित की गई निविदाओं को लेकर अलग-अलग स्तरों से शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसके बीते 26 दिसंबर को एक जांच समिति का गठन किया गया।

समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट 12 जनवरी को नगर आयुक्त नमामी बंसल को सौंपी। जांच के दौरान प्रस्तावित कार्यों के भौतिक सत्यापन के लिए पांच टीमों का गठन किया गया। टीमों की रिपोर्ट के आधार पर कुल 261 प्रस्तावित कार्यों में से 252 कार्यों को सही पाया गया, जबकि नौ कार्यों को निरस्त करने की सिफारिश की गई।

नगर आयुक्त ने निगम के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, पारदर्शिता और सजगता के साथ करें। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इन क्षेत्रों में हुए कार्य निरस्त

निरस्त किए गए कार्यों में अमन विहार ग्रीन व्यू रेजिडेंसी, चंद्रबनी, इंद्रा कालोनी, त्यागी रोड सहित विभिन्न वार्डों में सीसी सड़क, नाली, पुलिया और पुस्ता निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं।
अधिकारियों पर कार्रवाई, वेतन तक रोका

जांच रिपोर्ट के आधार पर क्षेत्रीय अवर अभियंता/सहायक अभियंता विनोद थपलियाल, राजेश रावत और रजित कोटियाल को प्रतिकूल प्रविष्टि देते हुए भविष्य में अधिक सतर्कता बरतने की कड़ी चेतावनी दी गई।

अवर अभियंता/सहायक अभियंता रविंद्र पंवार और रमेश बिष्ट का जनवरी का वेतन रोकते हुए चेतावनी जारी की गई। सूची में पुनरावृत्ति और अन्य विभागों के कार्य शामिल करने के मामले में पटल प्रभारी/लिपिक गौरी गुप्ता को तत्काल पटल से हटाकर उप नगर आयुक्त कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
जांच में पकड़ी गई त्रुटियां

  • क्रम संख्या एक से पांच तक के कार्य औचित्यपूर्ण नहीं पाए गए।
  • क्रम संख्या छह व सात में निविदा सूची में पुनरावृत्ति (डुप्लीकेसी) सामने आई।
  • क्रम संख्या आठ व नौ ऐसे कार्य थे, जिन्हें पहले ही अन्य विभागों की ओर से कराया जा चुका था, फिर भी उन्हें निगम की निविदा सूची में शामिल कर दिया गया।

पारदर्शिता के लिए नई नियमावली

नगर निगम ने विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने का निर्णय लिया है। अब सहायक अभियंता और अवर अभियंता को यह प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा कि प्रस्तावित कार्य औचित्यपूर्ण है और उस कार्य के लिए किसी अन्य विभाग की ओर से पूर्व में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
महापौर कोटे के कार्यों में पार्षदों ने लगाया भेदभाव का आरोप

देहरादून: नगर निगम प्रशासन के अनुसार, प्रथम बोर्ड अधिवेशन में प्रत्येक वार्ड के लिए 35-35 लाख रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए गए थे। वर्तमान में महापौर निधि से प्रत्येक वार्ड के लिए 20-20 लाख रुपये के विकास कार्य, पार्षदों की ओर से प्रस्तुत प्रस्तावों के आधार पर आगणन तैयार किए गए।

इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय विधायकों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर भी आगणन तैयार कर निविदाएं प्रकाशित की गई। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि चूंकि ये विकास कार्य महापौर निधि से प्रस्तावित हैं, इसलिए इन्हें केवल वार्ड स्तर तक सीमित न रखते हुए पूरे शहर की आवश्यकता को ध्यान में रखकर किए जाने का प्रस्ताव है।

अब इसमें किसी वार्ड में 20 से 22 लाख तो कहीं 70 से 80 लाख तक के कार्य शामिल किए गए। जिसका पार्षदों ने कड़ा विरोध किया। टेंडर सूची में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद जहां नगर आयुक्त ने जांच बैठा दी है और अधिशासी अभियंता को हटाने के आदेश दिए गए थे।
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