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बंगाल में निपाह वायरस केस मिलने से ओडिशा में अलर्ट, डॉक्टर ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं

deltin33 1 hour(s) ago views 241
  

ओडिशा में निपाह वायरस को अलर्ट। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में एक निजी अस्पताल में दो नर्सों के संदिग्ध निपाह वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। प्रारंभिक रिपोर्ट में उनके लक्षण निपाह वायरस से मेल खाते पाए गए हैं। उनके नमूने जांच के लिए एम्स भेजे गए हैं। संक्रमण को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय संयुक्त संक्रमण प्रतिक्रिया दल का गठन किया गया है।

हालांकि, पश्चिम बंगाल से ओडिशा के बीच रोजाना लोगों की आवाजाही होने के कारण ओडिशा के लिए यह चिंता का विषय बन गया है। ओडिशा में अब तक निपाह वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है।

कोविड-19 के दौरान जिस तरह अन्य राज्यों और विदेशों से आए लोगों के माध्यम से संक्रमण फैला था, उसका डर अभी भी लोगों के मन से पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। निपाह वायरस पशुओं, संक्रमित भोजन या सीधे मनुष्यों के संपर्क से फैल सकता है। संक्रमित लार, मल, मूत्र और रक्त के माध्यम से इसके फैलने की आशंका अधिक रहती है।
निपाह वायरस के लक्षण

संक्रमित व्यक्ति में बुखार के साथ सिरदर्द, गले में दर्द, दस्त, उल्टी, मांसपेशियों में दर्द और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर मामलों में मरीज के कोमा में जाने की आशंका भी रहती है। इसलिए नियमित रूप से हाथ धोने और संक्रमित सूअरों तथा चमगादड़ों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
ओडिशा सरकार की प्रतिक्रिया

जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि ओडिशा में पहले कभी निपाह वायरस की पहचान नहीं हुई है। यदि केंद्र सरकार कोई दिशा-निर्देश जारी करती है तो राज्य सरकार भी उसके अनुसार निर्देश जारी करेगी। फिलहाल इस मामले में घबराने की जरूरत नहीं है, ऐसा उन्होंने स्पष्ट किया।
ज़ूनोटिक बीमारियों से निपटने की तैयारी

वैश्विक जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य में पशुओं से मनुष्यों में रोग फैलने का खतरा बढ़ा है। इसलिए ऐसे रोगों या ज़ूनोटिक बीमारियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एक संयुक्त रणनीति तैयार करने की दिशा में काम कर रही हैं। वर्ष 2023 में इस विषय पर भुवनेश्वर में कई बैठकें आयोजित की गई थीं।

‘वन हेल्थ’ कार्यक्रम के तहत ज़ूनोटिक रोगों से निपटने के लिए राज्य के सात सेंटिनल साइट्स पर प्रयोगशालाएं स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही राज्य और जिला स्तर पर कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी और यह मैपिंग की जाएगी कि कौन-से ज़ूनोटिक रोग अधिक फैल रहे हैं।

हालांकि, इन योजनाओं पर अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं, इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के पास कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।

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