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जागरण संवाददाता, रायबरेली। बिजली विभाग में उपभोक्ताओं की समस्या के निराकरण के लिए ग्रामीण स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक अधिकारी बैठे हुए हैं। उच्चाधिकारी भी अधीनस्थों को प्राथमिक स्तर पर ही शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश देते रहते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि सारे दिशा निर्देश सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं।
हालात ये हैं कि कनेक्शन कटवाने के बाद भी उपभोक्ता को दो-दो साल तक लगातार बिल भेजा जा रहा है। यही नहीं ग्रामीण अंचल में लोगों को तीन माह का तीस-तीस हजार रुपये बिल भेजा दिया जाता है, जिसे सही कराने के लिए लोग कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
केस एक- पूरे शमशेर निवासी सुनीता का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2023 के अंत में घर में लगा बिजली का कनेक्शन कटवा दिया था। दो साल बाद भी उन्हें डिस्कनेक्शन की रसीद तक नहीं दी गई है। और तो और अभी भी उन्हें विभाग द्वारा बिल भेजा जा रहा है, जबकि डिस्कनेक्शन के समय ही कर्मचारी उनके घर से बिजली का मीटर भी लेकर चले गए थे।
केस दो- बरऊवा गांव के रहने वाले राम बहादुर का कहना है कि अक्टूबर 2025 में उन्होंने घर 15 हजार रुपये बिजली बिल जमा कराया था। जनवरी में वह बिल जमा करने गए तो पता चला कि दो महीने का बिल 30 हजार रुपये हो गया है।
राम बहादुर का कहना है कि ग्रामीण अंचल में दो माह में इतना अधिक बिल आना ही अपने आप में सवाल है, जिसे सही कराने के लिए वह कई बार उपकेंद्र के चक्कर लगा चुके हैं।
केस तीन- पूरे पिंडौर निवासी विनोद कुमार ने बताया कि अक्टूबर में उनके घर में पुराना मीटर बदलकर स्मार्ट मीटर लगाया गया। इसके बाद एक बार नौ हजार रुपये का बिजली बिल आया। दोबारा फिर छह हजार रुपये का बिल भेज दिया गया। विनोद का कहना है कि गलत बिल सही कराने के लिए वह कई बार उपकेंद्र जाकर शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं हो रहा है।
सभी अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर ही उपभोक्ताओं की शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि इसके बाद भी उपकेंद्र स्तर पर समाधान नहीं हो पा रहा है तो उपभोक्ता खंड या फिर अधीक्षण अभियंता कार्यालय में शिकायत करें। प्राथमिकता पर शिकायतों का निस्तारण कराया जाएगा, उपभोक्ताओं को समस्या नहीं होने दी जाएगी।
-प्रवीन कुमार, अधीक्षण अभियंता, वितरण मंडल प्रथम |
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