मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि. File Photo
राज्य ब्यूरो, देहरादून। नीति आयोग की ओर से जारी निर्यात तैयारी सूचकांक-2024 (एक्सपोर्ट प्रीपेयर्डनेस इंडेक्स) में उत्तराखंड ने छोटे राज्यों की श्रेणी में 52. 07 अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल कर देशभर में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। यह उपलब्धि राज्य की निर्यातोन्मुख नीतियों, उद्योग अनुकूल वातावरण और सुदृढ़ बुनियादी ढांचे का प्रतिफल मानी जा रही है।
सूचकांक के माध्यम से राज्यों की निर्यात क्षमता, नीतिगत ढांचे, व्यापार सहयोग, अवसंरचना और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र का आकलन किया गया है, जिसमें उत्तराखंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उत्तराखंड ने हिमाचल, जम्मू-कश्मीर व नागालैंड जैसे राज्यों को पीछे छोड़ दिया।
राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से लागू की गई सरल नीतियां, लाजिस्टिक्स सुधार, सिंगल विंडो सिस्टम, निवेश प्रोत्साहन योजनाएं और एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन इस सफलता के प्रमुख कारक रहे हैं। साथ ही कृषि, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, आयुष, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में निर्यात की संभावनाओं को सशक्त किया गया है।
निर्यात आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन है। इससे विदेशी मुद्रा अर्जन, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी और व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिलती है। उत्तराखंड की यह उपलब्धि राज्य को निवेश, औद्योगिक विस्तार और सतत आर्थिक विकास की नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
उत्तराखंड ने इन राज्यों को छोड़ा पीछे
जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, दादर एवं नागर हवेली, दमन और दीव, गोवा, त्रिपुरा, आसाम, पुंडूचेरी, चंडीगड़, मेघालय, लद्दाख, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, सिक्कम, अरुणाचल प्रदेश, अंडमान व निकोबार, मिजोरम, मणिपुर व लक्षद्वीप।
सीएम धामी ने दी प्रदेशवासियों को बधाई
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि नीति आयोग के निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 में छोटे राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड का शीर्ष स्थान प्राप्त करना राज्य के लिए गर्व का विषय है। यह सरकार की उद्योग समर्थक नीतियों, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हों और राज्य की अर्थव्यवस्था और अधिक सुदृढ़ बने।
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