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भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा! खरीदे जाएंगे 114 राफेल; 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील

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भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा खरीदे जाएंगे 114 राफेल (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के रक्षा क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा सौदा जल्द ही आकार ले सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय इस हफ्ते फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के प्रस्ताव पर अहम बैठक करने जा रहा है। इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।

ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह भारत का सबसे महंगा रक्षा सौदा होगा। इसके साथ ही भारतीय सेना में राफेल विमानों की कुल संख्या 176 हो जाएगी। फिलहाल वायुसेना के पास 36 राफेल हैं, जबकि नौसेना ने पिछले साल 26 राफेल मरीन विमानों का ऑर्डर दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय के अंदरूनी स्तर पर चर्चा होनी है। इसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा।
भारत में बनेंगे ज्यादातर विमान

सूत्रों ने बताया कि इस डील के तहत 12 से 18 राफेल विमान वायुसेना को सीधे रेडी-टू-फ्लाई हालत में मिल सकते हैं। बाकी ज्यादातर विमान भारत में ही बनाए जाएंगे, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री शामिल होगी। हालांकि, आमतौर पर \“मेक इन इंडिया\“ रक्षा सौदों में 50 से 60 प्रतिशत तक स्वदेशी सामग्री की मांग होती है, लेकिन इस सौदे में फिलहाल यह आंकड़ा कम रहने की बात कही गई है।

भारत इस डील में यह भी चाहता है कि फ्रांस, राफेल विमानों में भारतीय हथियारों और स्वदेशी सिस्टम को जोड़ने की अनुमति दे। हालांकि, विमान के सोर्स कोड फ्रांस के पास ही रहेंगे, ऐसा बताया गया है।
राफेल पर फोकस

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत यह कदम ऐसे समय उठा रहा है, जब अमेरिका ने F-35 और रूस ने Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान ऑफर किए हैं। इसके बावजूद भारत राफेल सौदे को आगे बढ़ा रहा है।

यह फैसला हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद लिया गया है, जहां दावा किया गया कि राफेल ने पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई में चीनी PL-15 मिसाइलों को अपने SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से नाकाम किया।

फ्रांस की ओर से हैदराबाद में M-88 इंजन (जो राफेल में इस्तेमाल होता है) के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा शुरू करने की भी योजना है। डसॉल्ट पहले ही भारत में मेंटेनेंस से जुड़ी कंपनी बना चुका है और टाटा जैसी भारतीय कंपनियों के भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की संभावना है।
वायुसेना को लड़ाकू विमानों की तत्काल जरूरत

भारत को मौजूदा हालात में लड़ाकू विमानों की तत्काल जरूरत है। आने वाले वर्षों में वायुसेना की ताकत मुख्य रूप से Su-30 MKI, राफेल और स्वदेशी लड़ाकू विमानों पर आधारित होगी। भारत पहले ही 180 LCA तेजस मार्क-1A विमानों का ऑर्डर दे चुका है। इसके अलावा, 2035 के बाद स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को बड़ी संख्या में शामिल करने की योजना भी है।

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