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अवैध जमाबंदी पर प्रशासन का करारा प्रहार; कांटी में कृषि विभाग की 44 डिसमिल जमीन वापस, सीओ का आदेश रद

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सांकेतिक तस्वीर



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री और जमाबंदी को लेकर सरकार के साथ प्रशासन का रुख सख्त हो गया है। इसके तहत कांटी स्थित कृषि विभाग की जमीन की रैयत के नाम से की गई दाखिल-खारिज को रद कर दिया गया है। कांटी की तत्कालीन एवं निलंबित सीओ रिषिका कुमारी के आदेश को डीसीएलआर पश्चिमी स्नेहा कुमारी ने रद कर दिया है। इस तरह कृषि विभाग की 44 डिसमिल जमीन पुन: उसके खाते में दर्ज हो गई है।

विदित हो कि बीज विस्तार प्रदेश की जमीन में से 44 डिसमिल का निबंधन पांच नवंबर, 2024 को जिला अवर निबंधन कार्यालय से कर दिया गया। सीतामढ़ी निवासी नवीन कुमार ने मोतीपुर के दीपक कुमार व कांटी निवासी गौरव कुमार को जमीन बेच दी। उनके आवेदन पर कांटी की तत्कालीन सीओ रिषिका कुमारी ने इसकी जमाबंदी कर दी। जबकि राजस्व कर्मचारी ने यह रिपोर्ट दी थी कि जमीन कृषि विभाग की है।

दाखिल-खारिज के आवेदन को अस्वीकृत करने की अनुशंसा कर दी गई, मगर रिषिका कुमारी ने अनुशंसा को दरकिनार कर जमीन की जमाबंदी कर दी। जबकि कांटी अंचल के कांटी कसबा मौजा में कृषि विभाग की 22.77 एकड़ जमीन खतियान में दर्ज है। राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र में यहां वर्षों से कृषि विभाग की ओर से खेती की जा रही है।

इस मामले को दैनिक जागरण ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसपर तत्कालीन कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने संज्ञान लेते हुए मामले की विस्तृत जांच का आदेश दिया। अपर समाहर्ता कुमार प्रशांत ने जांच रिपोर्ट में सीओ रिषिका कुमारी को इसके लिए जिम्मेदार माना। बाद में विभाग ने भी उसे निलंबित कर दिया।

कृषि अनुमंडल पदाधिकारी, पश्चिमी ने मामले को लेकर डीसीएलआर पश्चिमी कार्यालय में सीओ के आदेश के खिलाफ अपील दायर की।सुनवाई में डीसीएलआर पश्चिमी ने उक्त जमीन के कृषि विभाग के दावे को सही पाया। इसके बाद सीओ के आवेदन को निरस्त कर दिया गया। वहीं इसकी जमाबंदी रद किए जाने को लेकर अपर समाहर्ता के यहां से कार्रवाई की जा रही है।
बियाडा की जमाबंदी की गई जमीन की डीसीएलआर पश्चिमी ने मांगी रिपोर्ट

मोतीपुर अंचल के वरियारपुर मौजा की 16.86 एकड़ जमीन की अवैध जमाबंदी के मामले में भी तत्कालीन सीओ पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। डीएम ने पूर्व सीओ रुचि कुमारी के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है। इस बीच वरियारपुर मौजे की 52 डिसमिल जमीन की दाखिल-खारिज अपील की सुनवाई में डीसीएलआर पश्चिमी स्नेहा कुमारी ने पाया कि उक्त जमीन बिहार सरकार की है। इसे बबन सहनी के नाम से दर्ज कर दिया गया है। वहीं धनिक सहनी नामक व्यक्ति ने दाखिल-खारिज अपील दायर की है। उन्होंने सीओ से जमीन की विस्तृत रिपोर्ट उलब्ध कराने को कहा है।
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