राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में नए राजस्व जिलों के आधार पर जिला कोर्ट बनाने की मांग उठ गई है। दरअसल अब दिल्ली में 13 राजस्व जिले हो गए हैं मगर जिला कोर्ट अभी 11 ही हैं, वे भी हर जिला मुख्यालय पर स्थित नहीं हैं।
2012 में उपराज्यपाल की मंजूरी पर दिल्ली सरकार ने अधिसूचना जारी की थी कि जितने राजस्व जिला होंगे उतने ही जिला कोर्ट भी होंगी। स्वयं सेवी संस्था सेंटर फार यूथ, कल्चर, ला एंड एनवायरनमेंट ने उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री काे पत्र लिखा है। संस्था के अध्यक्ष पारस त्यागी ने इस बारे में सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया है।
लिखे पत्र में संस्था ने कहा है कि दिल्ली में अब राजस्व जिलों को 11 से बढ़ाकर 13 किया गया है। उन्होंने पत्र में कहा है कि अक्टूबर 2012 की अधिसूचना के माध्यम से कहा गया था कि हर सत्र डिवीजन के लिए एक सत्र न्यायालय (यानी, प्रति जिला पर एक जिला न्यायालय स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। मगर आज तक ऐसा नहीं हो सका है।
दिल्ली में जिला स्तर पर नहीं है कोर्ट
दिल्ली में ऐसा शासन ढांचा बना हुआ है कि हर जिला स्तर पर कोर्ट नहीं है। द्वारका, रोहिणी, साकेत, कड़कड़डूमा, नई दिल्ली और तीस हजारी कोर्ट हैं और हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट है। त्यागी ने कहा है कि जब हर जिला स्तर पर सरकार मिनी सचिवालय बनाने जा रही है तो सत्र न्यायालय के जिला स्तर पर स्थापित किए जाने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा है कि दिल्ली में अभी कोर्ट के लिहाज से 11 जिले ही हैं। यह मौलिक रूप से न्यायिक प्रशासन की आवश्यकताओं के साथ असंगत व्यवस्था है। ऐसे में इन जिलों की संख्या भी 13 की जानी चाहिए, जिससे कि अदालतों में काम का बोझ कम किया जा सकेगा। |