मुख्य सचिव अमृत प्रत्यय। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य में अब 50 करोड़ से अधिक की संरचनाओं की डीपीआर को वित्तीय स्वीकृति से पहले रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की तकनीकी अनुशंसा लेनी होगी। बुधवार को आयोजित संबंधित विभागों की बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने यह निर्देश दिया।
उन्होंने सरकारी विभागों को इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने को कहा। बैठक में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव डा. प्रतिमा तथा विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिव उपस्थित रहे। बैठक में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव डॉ. प्रतिमा तथा विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिव उपस्थित रहे।
बैठक में जानकारी दी गई कि भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान के सहयोग से अवसंरचना परियोजनाओं के लिए डीपीआर के लिए एक डिजिटल टूल विकसित किया जा रहा है। यह टूल पीएम गति शक्ति पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न विभागीय डेटा का उपयोग कर परियोजनाओं की योजना, अलाइनमेंट एवं आकलन में सहायता करेगा। यह डीपीआर को अधिक सटीक बनाएगा।
उपस्थित विभागों ने सहमति व्यक्त की कि इस व्यवस्था से कार्यों की पुनरावृत्ति पर रोक लगेगी, लागत में बचत होगी तथा सड़कों के अलाइनमेंट जैसे मामलों में भूमि, वन, क्रास-ड्रेनेज जैसी संभावित बाधाओं की पहचान प्रारंभिक चरण में ही संभव हो सकेगी। यह प्रणाली आपदा प्रबंधन एवं पराली जलाने जैसी गतिविधियों की निगरानी में भी सहायक होगी। इस व्यवस्था का लाभ सभी विभागों द्वारा आवश्कता अनुसार उठाया जा सकेगा।
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