संतोष शुक्ल, लखनऊ। कहते हैं कि चेहरा सेहत का राज बता देता है। अब इसे एआइ आधारित तकनीक वैज्ञानिक रूप से साबित कर रही है। अगर आप मोबाइल के सामने खड़े हो जाएं और 20 सेकंड में स्क्रीन पर सेहत की पूरी रिपोर्ट खुल जाए तो क्या कहेंगे। एआइ हेल्थ समिट की प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई, इटावा के मेडिसिन विभाग की डिवायस देखकर हैरान रह गए।
स्क्रीन के सामने खड़े होने वालों की बीपी, पल्स, कार्डियावैस्कुलर लोड, पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम, हार्ट एवं ब्रीथिंग रेट समेत आठ पैरामीटरों की जानकारी तत्काल मिल गई। विश्विविद्यालय ने एआइ बेस्ड बीपी क्लीनिक भी शुरू किया है, जहां बीपी मानीटर एप नामक से अब तक दो हजार से ज्यादा मरीजों की 92 से 95 प्रतिशत सटीकता के साथ जांच की जा चुकी है।
ओपीडी में किया जार हा डिवायस का प्रयोग
मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर और एआइ विंग के प्रभारी डा. सुशील यादव ने बताया कि छह माह से ओपीडी में इस डिवायस का प्रयोग किया जा रहा है। एआइ तकनीक पर आधारित मोबाइल-टैबलेट की स्क्रीन इंफ्रारेड और थर्मल रेडिएशन के जरिए चेहरे की रक्त वाहिकाओं में खून के प्रवाह का विश्लेषण कर आाठ मानकों पर सेहत की पूरी जानकारी दे देता है।
इसमें तनाव का स्तर में भी शामिल है। मेडिसिन विभाग की टीम इस विषय पर शोधपत्र भी बना चुकी है। टीम का कहना है कि सामान्य मानीटरों की सटीकता 85 प्रतिशत के आसपास होती है, लेकिन बीपी समेत सभी मानकों में सटीकता कई बार 95 प्रतिशत से ज्यादा दर्ज हुई। इसके लिए जांच रिपोर्ट को क्रास वेरीफाई किया गया।
उत्तर प्रदेश आर्युविज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के वाइस चांसलर डा. अजय सिंह ने बताया कि एआइ की मदद से फैटी लिवर एवं हेपेटाइटिस को शुरुआती चरण में पकड़ने वाली डिवायस भी विकसित की गई है, जिसे लिवर के पास लगाकर ब्लूटूथ से कनेक्ट करने पर सूजन समेत अन्य संबंधित विकारों की जानकारी हो जाती है।
इस डिवायस को राष्ट्रीय वायरस हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम से भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। डा. सुशील यादव ने बताया कि एआइ बेस्ड बीपी क्लीनिक शुरू करने के लिए कई अन्य चिकित्सालयों ने संपर्क किया है। कई मेडिकल कालेजों में प्रजेंटेशन की तैयारी है। |
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