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योगी सरकार की 6 नए नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर को हरी झंडी, अब घंटों का सफर मिनटों में... इन 24 जिलों को मिलेगा सीधा फायदा

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हेमंत श्रीवास्तव, लखनऊ। प्रदेश सरकार द्वारा केंद्र से राज्य में उत्तर से दक्षिण के जिलों को जोड़ने के लिए एक्सप्रेसवे और हाईवे की मांग के बीच छह नए नार्थ-साउथ कारीडोर के प्रस्ताव को राज्य सरकार की हरी झंडी मिल गई है। इन नए कारीडोर के बन जाने पर दो दर्जन से अधिक जिले के लोगों का आवागमन आसान होगा।

इन जिलों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी, जिससे रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। लोकनिर्माण विभाग द्वारा बनाए जाने वाले प्रस्तावित कारीडोर के हिस्सों की काययोजना स्वीकृत हो गई है। जल्द ही कैबिनेट से एस्टीमेट स्वीकृत कराने की तैयारी गई है।

इन नए कारीडोर को बनाने के प्रस्ताव का प्रस्तुतिकरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष किया जा चुका है। प्रस्तावों पर मुख्यमंत्री की सहमति मिल गई है। नार्थ-साउथ कारीडोर की ऐसी पहल पहली बार की गई है। राज्य में अब तक बने एक्सप्रेसवे व हाईवे पूर्व से पश्चिम दिशा में हैं।

पिछले करीब दो साल से मुख्यमंत्री उत्तर से दक्षिण को जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे और हाईवे बनवाने की कोशिश में लगे हैं। जिसके तहत सीएम ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भी इसकी मांग की थी। हाल ही में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने भी उत्तर से दक्षिण के लिए कारीडोर बनाए जाने की मांग रखी है।

पहला श्रावस्ती-प्रयागराज कारीडोर
पहला कारीडोर इकाउना (श्रावस्ती)-अयोध्या-सुल्तानपुर-प्रयागराज का है। जिसकी कुल लंबाई 262 किलोमीटर है। चार पैकेज में इस कारीडोर का काम होगा। जिसमें इकाउना-बलरामपुर खंड 25 किलोमीटर, बलरामपुर-अयोध्या 86 किलोमीटर, अयोध्या-प्रतापगढ़ खंड 93 किलोमीटर और प्रतापगढ़-प्रयागराज खंड 58 किलोमीटर शामिल है। प्रस्तावित कारीडोर शामली-गोरखपुर हाईवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे को भी जोड़ेगा।

प्रतापगढ़-प्रयागराज खंड पहले से ही चार लेन है। बलरामपुर-अयोध्या 86 किलोमीटर और अयोध्या-प्रतापगढ़ 93 किलोमीटर सिक्स लेन ग्रीनफील्ड हाईवे बनाया जाएगा। इकाउना-बलरामपुर खंड 25 किलोमीटर दो लेन है इसे फोर लेन पैव्ड सोल्डर बनाने का काम एनएचएआइ अथवा मोर्थ करेंगे।

कुशीनगर से वाराणसी कारीडोर
दूसरा कारीडोर कुशीनगर-देवरिया-दोहरीघाट-गाजीपुर-जमानिया होते हुए वाराणसी तक है। कुशीनगर-देवरिया का 35 किलोमीटर, देवरिया-दोहरीघाट 22 किलोमीटर, दोहरीघाट-गाजीपुर का 83 किलोमीटर और गाजीपुर-वाराणसी 80 किलोमीटर शामिल है। कारीडोर की कुल लंबाई 220 किलोमीटर है। दोहरीघाट-मऊ-गाजीपुर खंड तथा गाजीपुर-वाराणसी पहले से चार लेन हैं। जबकि कुशीनगर-देवरिया और देवरिया-दोहरीघाट खंड का कार्य लोक निमार्ण द्वारा किया जाएगा। जिसकी अनुमानित लागत 342 करोड़ रुपये है। प्रति किलोमीटर की अनुमानित लागत छह करोड़ रुपये है।

तीसरा कारीडोर नेपाल सीमा से प्रयागराज तक
तीसरा कारीडोर पिपरी (भारत-नेपाल) सीमा से बांसी (सिद्धार्थनगर) से प्रयागराज तक है, जिसकी कुल लंबाई 295 किलोमीटर है। पहला हिस्सा नौ किलोमीटर का पिपरी-बर्डपुर है, इसके बाद बर्डपुर-टांडा 123 किलोमीटर, टांडा-सुरहुरपुर 30 किलोमीटर, सुरहुरपुर-शाहगंज 28 किलोमीटर, शाहगंज-मुंगरा बादशाहपुर 68 किलोमीटर, और मुंगरा बादशाहपुर से प्रयागराज 37 किलोमीटर है।

यह कारीडोर शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और विंध्य एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा। तीन खंडो का काम पीडब्ल्यूडी करेगा जबकि दो खंडों का काम एनएचएआइ अथवा मोर्थ करेंगे। पीडब्ल्यूडी 107 किलोमीटर का काम 642 करोड़ रुपये में और मोर्थ 123 किलोमीटर का काम 738 करोड़ की लागत से करेगा।

लखीमपुर से बांदा तक कारीडोर
चौथा कारीडोर लखीमपुर-सीतापुर-लखनऊ-नवाबगंज-लालगंज-चौदगरा-जोनिहा-ललौली-अतरहट से बांदा तक है जिसकी कुल लंबाई 502 किलोमीटर है। इसमें लखीमपुर-सीतापुर 89 किलोमीटर, सीतापुर-लखनऊ-नवाबगंज 193 किलोमीटर, नवाबगंज-लालगंज 70 किलोमीटर, उन्नाव-चौदगरा 59 किलोमीटर, चौदगरा-जोनिहा 29 किलोमीटर, जोनिहा-ललौली 17 किलोमीटर, ललौली-बांदा 45 किलोमीटर शामिल हैं। लखीमपुर-सीतापुर और उन्नाव-चौदगरा के पहले से ही चार-लेन हैं। दो खंडों का काम पीडब्ल्यूडी और दो खंडों का काम एनएचएआइ/मोर्थ को करना है।पीडब्ल्यूडी 276 करोड़ रुपये और एनएचएआइ/मोर्थ 132 करोड़ रुपये की लागत से काम करेगा।

बरेली से ललितपुर तक 547 किमी का कारीडोर
पांचवां कारीडोर बरेली-आगरा-झांसी से ललितपुर तक 547 किलोमीटर का है। इसमें 216 किलोमीटर बरेली-कासगंज-आगरा है, जिसके निर्माण और अपग्रेडेशन के लिए ठेका दिया गया है। एनएचएआइ यह काम कराएगा। जबकि 234 किलोमीटर का आगरा-झांसी और 97 किलोमीटर झांसी-ललितपुर हिस्सा पहले से ही चार-लेन है। यह कारीडोर प्रस्तावित शामली गोरखपुर हाईवे के साथ ही गंगा और यमुना एक्सप्रेस वे को भी जोड़ेगा। 59 किलोमीटर का काम एनएचएआइ/मोर्थ द्वारा लगभग 354 करोड़ रुपये से कराएंगे।

पीलीभीत से उरई-हरपालपुर तक 514 किमी का हाईवे
छठवां कारीडोर मुस्तफाबाद (पीलीभीत टाइगर रिजर्व)-शाहजहांपुर-उरई-हरपालपुर तक है जिसकी कुल लंबाई 514 किलोमीटर है। इसमें 32 किलोमीटर का मुस्तफाबाद-पूरनपुर है। 81 किलोमीटर का पूरनपुर-पुवायां, 29 किलोमीटर, पुवायां-शाहजहांपुर और शाहजहांपुर-मुंडेर 56 किलोमीटर को चार लेन प्रस्तावित किया गया है।

ये मार्ग अभी दो लेन हैं। मुंडेर-फर्रुखाबाद-उरई स्ट्रेच 92 किलोमीटर और 125 किलोमीटर के दो हिस्सों में गंगा एक्सप्रेसवे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के बीच प्रस्तावित फर्रुखाबाद लिंक और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के ज़रिए होगा। उरई-राठ 54-किलोमीटर और राठ-हरपालपुर 45-किलोमीटर पहले से ही फोर-लेन हैं। इस कारीडोर का काम 528 करोड़ रुपये से पीडब्ल्यूडी और 660 करोड़ रुपये से एनएचएआइ/मोर्थ काम करेंगे।


प्रस्तावित कारीडोर में पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाए जाने वाले हिस्सो की कार्ययोजना स्वीकृत हो गई है। एनएचएआइ/मोर्थ को उनके द्वारा बनाए जाने वाले हिस्सों की सूचना भेज दी गई है। जल्द ही इस्टीमेट प्रस्ताव कैबिनेट से स्वीकृत कराते हुए काम शुरू कर दिया जाएगा। दो साल के अंदर सभी कारीडोर बना दिए जाएंगे। -अजय चौहान, प्रमुख सचिव, पीडब्ल्यूडी
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