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Makar Sankranti 2026: तिल का दान क्यों है महादान? पद्म पुराण में छिपा है इसकी उत्पत्ति का रहस्य

Chikheang 2026-1-15 10:26:24 views 535
  

भगवान विष्णु से जुड़ा है तिल का कनेक्शन



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मकर संक्रांति की सुबह, छतों पर उड़ती पतंगें और रसोई से आती गुड़-तिल की सौंधी खुशबू-यह एहसास ही मन को उत्साह से भर देता है। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटा सा \“तिल\“ इस बड़े त्योहार का केंद्र कैसे बन गया? आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह कोई साधारण बीज नहीं है, बल्कि इसका इतिहास सृष्टि के पालनहार और सौरमंडल के सबसे शक्तिशाली ग्रहों की एक अनोखी गाथा से जुड़ा है।
तिल की उत्पत्ति का इतिहास

पौराणिक ग्रंथों, विशेषकर पद्म पुराण में इसका उल्लेख मिलता है कि तिल की उत्पत्ति किसी साधारण पौधे से नहीं हुई। कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु के शरीर से पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरीं, तो वे काले और सफेद तिल के रूप में अंकुरित हो गईं। चूंकि, यह साक्षात नारायण के अंश से उत्पन्न हुआ है, इसीलिए शास्त्रों में इसे \“अमृत\“ के समान माना गया है। यही कारण है कि पूजा, हवन और पितरों के तर्पण में तिल को सबसे पवित्र वस्तु के रूप में शामिल किया जाता है।

  

(Image Source: Free)
सूर्य और शनि की कड़वाहट दूर करने वाला \“तिल\“

मकर संक्रांति का दिन पिता (सूर्य) और पुत्र (शनि) के मिलन का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव और उनके पुत्र शनि के बीच संबंध अच्छे नहीं थे। लेकिन, जब सूर्य देव अपने पुत्र के घर (मकर राशि) में प्रवेश करने वाले थे, तब शनि देव ने उनका स्वागत काले तिल से किया था।

शनि देव की इस सेवा से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने वरदान दिया कि जो भी इस दिन मकर राशि के प्रवेश काल में काले तिल से उनकी और शनि देव की पूजा करेगा, उसके जीवन के सभी कष्ट और \“शनि दोष\“ दूर हो जाएंगे। तब से ही रिश्तों की कड़वाहट दूर करने और सुख-शांति के लिए तिल का दान और सेवन जरूरी माना गया।
पुण्य प्राप्ति के छह मार्ग

धर्मशास्त्रों में तिल के छह विशेष उपयोग बताए गए हैं, जिन्हें करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है:

तिल स्नान: पानी में तिल डालकर नहाना।

तिल उबटन: शरीर पर तिल का लेप लगाना।

तिल हवन: अग्नि में तिल की आहुति देना।

तिल तर्पण: पितरों को तिल मिला हुआ जल अर्पित करना।

तिल भोजन: तिल से बने व्यंजन ग्रहण करना।

तिल दान: जरूरतमंदों को तिल का दान करना।
सेहत का विज्ञान

धार्मिक महत्व के साथ-साथ इसका वैज्ञानिक आधार भी है। संक्रांति के समय भीषण ठंड होती है। तिल की तासीर गर्म होती है और इसमें भरपूर कैल्शियम, आयरन और ओमेगा-6 फैटी एसिड होता है। जब इसे गुड़ के साथ खाया जाता है, तो यह शरीर को भीतर से गर्माहट देता है और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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