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Rudraksha ke Niyam: रुद्राक्ष पहनने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, वरना हो सकता है नुकसान

Chikheang Yesterday 16:26 views 754
  

रुद्राक्ष पहनने के लाभ (Picture Credit: Freepik) (AI Image)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से मानी जाती है। रुद्राक्ष धारण करने के कई लाभ बताए गए हैं। इसके साथ ही रुद्राक्ष की माला से मंत्रों का जप करना भी अत्यंत फलदायी होता है। यह माना गया है कि रुद्राक्ष की माला पर किया गया जप कई गुना अधिक फल प्रदान करता है और जातक की आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।
रुद्राक्ष धारण करने के लाभ

  • नियमानुसार रुद्राक्ष धारण करने से साधक को भगवान शिव की कृपा तो मिलती ही है, साथ ही यह मन को शांत रखने का काम भी करता है।
  • एकाग्रता (Concentration) बढ़ाने के लिए भी रुद्राक्ष धारण करना अच्छा माना गया है। ऐसे में छात्रों के लिए यह विशेष लाभदायक है।
  • नियमों के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने से नकारात्मक ऊर्जा व बुरी नजर का प्रभाव दूर रहता है।
  • रुद्राक्ष, मन में आने वाले अशुद्ध और बुरे विचारों को भी नियंत्रित करने का भी काम करता है।
  • ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष से ग्रहों के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है।
  • रुद्राक्ष धारण करने से जातक को हर कार्य में सफलता मिलती है।
  
इस तरह करें धारण

रुद्राक्ष को कभी भी सीधा बाजार से लाकर धारण नहीं करना चाहिए, बल्कि पहले इसे गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करना चाहिए और इसके बाद ही धारण करना चाहिए। शुभ मुहूर्त में 108 बार \“ॐ नमः शिवाय\“ का जप करते हुए इसकी प्राण-प्रतिष्ठा करें या फिर मंदिर में शिवलिंग से स्पर्श कराने के बाद ही इसे धारण करें।
इन गलतियों से बचें

शौचालय जाते समय रुद्राक्ष उतार देना चाहिए। इसके साथ ही सोते समय भी इसे उतारकर सोना चाहिए और किसी पवित्र स्थान या मंदिर में रख देना चाहिए। क्योंकि रुद्राक्ष की माला को पहनकर सोने से इसके टूटने की संभावना बनी रहती है।

इसके साथ ही किसी अशुद्ध स्थान जैसे श्मशान घाट या जहां किसी की मृत्यु हुई हो, वहां भी रुद्राक्ष पहनकर नहीं जाना चाहिए। यदि आप रुद्राक्ष धारण करते हैं, तो आपको मांस-मदिरा व नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहना चाहिए, तभी आपको इसका पूरा लाभ मिल सकता है।

  

(AI Generated Image)
रुद्राक्ष से जुड़ी जरूरी बातें

रुद्राक्ष धारण करने के लिए अमावस्या, पूर्णिमा, सावन, सोमवार या शिवरात्रि का दिन सबसे उत्तम माना गया है। इसके साथ ही रुद्राक्ष को हमेशा साफ रखना चाहिए। कभी भी अपना पहना हुआ रुद्राक्ष किसी दूसरे को नहीं देना चाहिए और न ही किसी दूसरे का पहना हुआ रुद्राक्ष स्वयं पहनें। इन नियमों की अनदेखी करने पर आपको रुद्राक्ष के लाभ की जगह अशुभ परिणाम भी मिल सकते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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