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बिहार में पेट्रोलियम उत्पादों का सर्वाधिक निर्यात, मांस-मक्के की भी विदेशों में मांग

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सांकेतिक तस्वीर



नलिनी रंजन, पटना। पूर्वी भारत का प्रमुख राज्य बिहार अब देश के आर्थिक और निर्यात परिदृश्य में तेज़ी से अपनी अलग पहचान बना रहा है। प्रमाण नीति आयोग द्वारा जारी निर्यात तैयारी सूचकांक (निर्यात तत्परता सूचकांक - ईपीआइ) 2024 में बिहार ने तीन पायदान की छलांग लगाते हुए 19वें स्थान से 16वां स्थान हासिल किया है।

वित्त वर्ष 2024 में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 8.5 लाख करोड़ रहा, जो पिछले आठ वर्षों में लगभग 11 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है। यह प्रगति कृषि उत्पादकता में सुधार, औद्योगिक विस्तार और निर्यात प्रोत्साहन पर केंद्रित सक्रिय सरकारी नीतियों का परिणाम माना जा रहा है।

निर्यात में पहले स्थान पेट्रोलियम तेल है। वहीं, दूसरे स्थान पर मांस तथा तीसरे पर पेट्रोलियम गैस है। पेट्रोलियम उत्पाद के कारण राज्य में बेगूसराय जिला पहले स्थान पर है। मांस उत्पादन और मक्का के कारण अररिया दूसरे तथा पश्चिम चंपारण तीसरे स्थान पर है। नालंदा के राजगिर में आयुध फैक्ट्री से विस्फोटक प्रणोदक पाउडर निर्यात किए जाते हैं।
संसाधन विकास बेहतर, उद्यमियों की परेशानी को दूर करने की जरूरत

नीति आयोग के वरिष्ठ सलाहकार संजीत सिंह बताते है कि बिहार में आधारभूत संरचना एवं संसाधन का तेजी से विकास हुआ है। अब यहां इज डूइंग बिजनेस का उत्तर प्रदेश माडल भी लागू करें तो तेजी से निर्यातक सूचकांक में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि बिहार में संसाधन की कमी नहीं है। यहां कार्य भी बेहतर हो रहा है। अब यहां जरूरत है बस उद्यमियों की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने की। उनकी समय-समय पर बैठक करें, उसमें उनकी परेशानियों को समझे और उसकी निपटान करने से स्थिति में आश्चर्यजनक वृद्धि दर्ज होगी।
कृषि और पेट्रोलियम निर्यात बने आधार

बिहार की अर्थव्यवस्था और निर्यात का मजबूत आधार आज भी कृषि है। उपजाऊ गंगा के मैदानी इलाकों में उत्पादित चावल, गेहूं, मक्का और बेबी कार्न राज्य के निर्यात राजस्व में अहम योगदान दे रहे हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर की शाही लीची, जिसे जीआई टैग प्राप्त है, वैश्विक बाजार में बिहार की कृषि पहचान का प्रतीक बन चुकी है। पिछले 15 वर्षों में कृषि निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

इसके साथ ही बेगूसराय स्थित बरौनी रिफाइनरी ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को नई मजबूती दी है। इंडियन ऑयल कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा संचालित यह रिफाइनरी आज 60 लाख टन प्रतिवर्ष की क्षमता के साथ डीजल, पेट्रोल, एलपीजी, बिटुमेन सहित कई उत्पादों का उत्पादन कर रही है, जिनका निर्यात नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में भी होता है।
निर्यात प्रोत्साहन नीति से मिला बल

बिहार निर्यात प्रोत्साहन नीति 2024 के तहत राज्य सरकार ने निर्यातकों को एफओबी मूल्य पर एक प्रतिशत सब्सिडी, प्रदर्शन आधारित अतिरिक्त प्रोत्साहन, तथा महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति और दिव्यांग निर्यातकों को विशेष लाभ देने की व्यवस्था की है। इसके साथ ही पुरस्कार, क्रेता-विक्रेता बैठकें और जीआई व ओडीओपी उत्पादों के प्रचार से निर्यात माहौल को सशक्त किया जा रहा है। एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत भागलपुर का रेशम, मधुबनी पेंटिंग और दरभंगा की सिक्की हस्तशिल्प जैसे उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा रहा है, इससे कारीगरों और लघु उत्पादकों की आय में बढ़ोतरी हो रही है।
टाप निर्यात हाेने वाली चीजें

  • पेट्रोलियम आयल : 9959 करोड़
  • मांस : 1,584 करोड़
  • पेट्रोलियम गैस : 954 करोड़
  • मक्का : 883 करोड़
  • चावल : 700 करोड़
  • विस्फोटक प्रणोदक पाउडर : 343 करोड़
  • दवा : 212 करोड़
  • गेंहूं : 184 करोड़
  • आलू : 133 करोड़
  • रबर टायर : 115 करोड़

निर्यात में हिस्सेदारी वाले प्रमुख देश

  • नेपाल : 83.46 प्रतिशत
  • मिश्र : 3.27 प्रतिशत
  • बांग्लादेश : 2.14 प्रतिशत
  • मलेशिया : 2.04 प्रतिशत
  • नाइजीरिया : 1.92 प्रतिशत

मानक और स्कोर

    क्षेत्र कुल स्कोर प्राप्त स्कोर प्रतिशत
   
   
   यूटीलिटिज
   10
   5.1
   51%
   
   
   लॉजिस्टिक
   10
   1.1
   11%
   
   
   बिजनेस इकोसिस्टम
   40
   15.1
   37.75%
   
   
   पालिसी एंड गर्वनेंस
   20
   15.3
   76.5%
   
   
   एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस
   20
   9.2
   46%
   
   
   कुल
   100
   45.8
   45.8%
   
मूल सेक्टर

  • पेट्रोलियम उत्पाद : बरौनी रिफाइनरी के माध्यम से डीजल, पेट्रोल, एलपीजी, बिटुमेन जैसे उत्पादों का घरेलू व अंतरराष्ट्रीय निर्यात।
  • कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग : चावल, मक्का, गेहूं, लीची, मखाना सहित कच्चे और आंशिक रूप से प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों का निर्यात।
  • लेदर उत्पाद : पशुपालन आधारित कच्चे माल पर आधारित चमड़ा और उससे जुड़े उत्पादों का निर्यात।
  • हैंडलूम एवं टेक्सटाइल : भागलपुरी रेशम, पारंपरिक वस्त्र और हस्तनिर्मित कपड़ों के माध्यम से बिहार की वैश्विक पहचान।

उभरते हुआ सेक्टर

  • केमिकल्स : औद्योगिक उपयोग और कृषि से जुड़े रसायनों का सीमित लेकिन बढ़ता उत्पादन व निर्यात।
  • इको-फ्रेंडली पैकेजिंग : बायोडिग्रेडेबल, कागज आधारित और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग उत्पादों की बढ़ती मांग।
  • आर्गेनिक फूड प्रोडक्ट्स : जैविक अनाज, मखाना, दलहन और प्रसंस्कृत स्वास्थ्यवर्द्धक उत्पाद, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है।
  • फार्मास्यूटिकल्स : दवाओं के मिश्रित फार्मूलेशन, एंटीबायोटिक्स और विशेष औषधियों के निर्यात के साथ उभरता औद्योगिक आधार।
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